मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र›खण्ड-ब: समाजशास्त्र›इकाई-1 समाजशास्त्र की आधारभूत अवधारणा›अनुष्ठान - विभिन्न संदर्भ, जाति व्यवस्था। आश्रम, पुरुषार्थ, समाज और विवाह पर धर्म और संप्रदायों का प्रभाव›सामान्यतः वर्ण कितने थे? जी० एस० घुरिये के अनुसार प्रारम्भ में दो

सामान्यतः वर्ण कितने थे? जी० एस० घुरिये के अनुसार प्रारम्भ में दो वर्ण कौन-से थे?

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आदर्श उत्तर

वर्ण व्यवस्था एवं जी.एस. घुर्ये का विचार:

  • कुल वर्ण: चार वर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र)।
  • प्रारंभिक दो वर्ण (जी.एस. घुर्ये के अनुसार): प्रारंभिक ऋग्वैदिक काल में केवल दो मूल वर्ण थे:
    1. आर्य वर्ण (Arya Varna)
    2. दास / दस्यु वर्ण (Dasa Varna)।

In English (Question & Model Answer)

Generally how many Varnas were there? According to G. S. Ghurye, what were the two Varnas in the beginning?

Varnas & G.S. Ghurye's Perspective:

  • Total Varnas: Four (Brahmana, Kshatriya, Vaishya, Shudra).
  • Initial Two Varnas (According to Dr. G.S. Ghurye): In the early Rigvedic period, only two primary Varnas existed based on racial/cultural distinction:
    1. Arya Varna (आर्य वर्ण)
    2. Dasa / Dasyu Varna (दास / दस्यु वर्ण).
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