मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र›खण्ड-ब: विज्ञान, तकनीकी एवं जन स्वास्थ्य›इकाई-1 सामान्य विज्ञान›प्राचीन समय में आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त एवं भास्कर प्रथम एवं द्वितीय द्वारा खगोल शास्त्र में योगदान। प्राचीन एवं आधुनिक भारतीय वेधशालाओं से संबंधित प्रारंभिक जानकारी›खगोलशास्त्र में आर्यभट्ट के योगदान पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।

खगोलशास्त्र में आर्यभट्ट के योगदान पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।

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आदर्श उत्तर

खगोलशास्त्र में आर्यभट्ट का योगदान:

  1. पृथ्वी का घूर्णन: सर्वप्रथम बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है तथा सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है।
  2. ग्रहण की वैज्ञानिक व्याख्या: सूर्य व चंद्र ग्रहण राहु-केतु द्वारा ग्रसने से नहीं बल्कि चंद्रमा और पृथ्वी की छाया पड़ने से होते हैं।
  3. प्रमुख ग्रंथ: 'आर्यभटीय' एवं 'सूर्य सिद्धांत'।

In English (Question & Model Answer)

Write a short note on the contribution of Aryabhatta in astronomy.

Contributions of Aryabhatta in Astronomy:

  1. Earth's Axial Rotation: First Indian astronomer to scientifically state that the Earth rotates on its own axis.
  2. Scientific Eclipse Mechanics: Disproved mythological theories by proving eclipses are cast by shadows of the Earth and Moon.
  3. Celebrated Treatises: Aryabhatiya and Surya Siddhanta.
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