मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक/विचारक, समाज सुधारक›गुरुनानक, कबीर, तुलसीदास, संत रविदास›क्या उसे अपने मित्रों का पक्ष लेना चाहिए?

क्या उसे अपने मित्रों का पक्ष लेना चाहिए?

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आदर्श उत्तर

उत्तर: कदापि नहीं।
मित्रों का पक्ष लेना पद के दुरुपयोग, भाई-भतीजावाद (Nepotism), न्यायिक शपथ के उल्लंघन और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। लोक सेवक का सर्वोच्च दायित्व केवल संविधान, कानून और सत्यनिष्ठा के प्रति है, व्यक्तिगत मित्रता के प्रति नहीं।

In English (Question & Model Answer)

Should he take the side of his friends?

Answer: Absolutely not.
Favoring personal friends constitutes severe abuse of power, nepotism, professional misconduct, and a direct violation of the oath of office. A public official's paramount loyalty lies with the Constitution, statutory law, and impartial justice.

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