मुख्य›MPPSC Mains (हिन्दी)›सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र›खण्ड-अ: दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी›इकाई-1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक/विचारक, समाज सुधारक›गुरुनानक, कबीर, तुलसीदास, संत रविदास›क्या उसे मेरिट के आधार पर निर्णय देना चाहिए?

क्या उसे मेरिट के आधार पर निर्णय देना चाहिए?

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आदर्श उत्तर

उत्तर: मेरिट पर निर्णय तभी उचित है जब केस में कोई व्यक्तिगत पूर्वाग्रह या हितों का टकराव न हो।
चूँकि यहाँ वकीलों से घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंध हैं, अतः मेरिट का दावा करने के बावजूद प्रक्रियात्मक न्याय (Procedural Justice) की दृष्टि से स्वयं को केस से अलग करके अन्य निष्पक्ष पीठ को सौंपना ही एकमात्र नैतिक कदम है।

In English (Question & Model Answer)

Should he give judgement on the basis of merit?

Answer: Deciding on merit is an essential duty, but only when no conflict of interest exists.
In cases involving close personal acquaintances, procedural integrity requires recusal first, ensuring that merit-based adjudication is conducted by an entirely detached, neutral adjudicator.

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