मुख्य›एमपीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा›प्रश्न पत्र 1: सामान्य अध्ययन›सामान्य अध्ययन›भारत का इतिहास›प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा: भारतवर्ष, वेद, उपनिषद, आरण्यक, ब्राह्मण ग्रंथ, षड्दर्शन, स्मृतियाँ, संस्कार, पंच महायज्ञ, कर्म सिद्धांत, बोधिसत्व, तीर्थंकर›किस वेद में सभा और समिति को पृथक संस्थाओं के रूप में घोषित किया गया

किस वेद में सभा और समिति को पृथक संस्थाओं के रूप में घोषित किया गया है ?

20242Mprelimsyear-2024p1
A.(A) ऋग्वेद
B.(B) सामवेद
C.(C) अथर्ववेदसही
D.(D) यजुर्वेद
व्याख्या एवं हल

सही उत्तर (C) अथर्ववेद है।

  • अथर्ववेद (काण्ड 7, सूक्त 12, श्लोक 1) में सभा और समिति को पृथक संस्थाओं के रूप में प्रजापति की दो जुड़वां पुत्रियाँ ("सभा च मा समितिश्चावतां प्रजापतेर्दुहितरौ संविदाने") घोषित किया गया है।
  • वैदिक शासन प्रणाली में सभा विशिष्ट जनों व वृद्धों की परामर्शदात्री परिषद थी, जबकि समिति जनसाधारण की राष्ट्रीय प्रतिनिधि सभा थी जिसे राजा के निर्वाचन का अधिकार प्राप्त था।
  • यद्यपि ऋग्वेद में सभा एवं समिति का उल्लेख मिलता है, किंतु इन्हें प्रजापति की दो पुत्रियों के रूप में विशिष्ट पहचान अथर्ववेद में प्रदान की गई है।

In English (Question & Model Answer)

In which Vedas are Sabha and Samiti included as separate institutions ?

A.(A) Rigveda
B.(B) Samaveda
C.(C) AtharvavedaCorrect
D.(D) Yajurveda

The correct answer is (C) Atharvaveda.

  • In the Atharvaveda (Kanda VII, Sukta 12, Verse 1), Sabha and Samiti are explicitly declared as separate institutions and described as the two twin daughters of Prajapati ("सभा च मा समितिश्चावतां प्रजापतेर्दुहितरौ संविदाने").
  • In Vedic polity, the Sabha was a council of select elders and nobles, whereas the Samiti was a general representative assembly of the entire community with powers to elect or depose the king (Rajan).
  • Rigveda contains earliest references to these bodies, but their philosophical personification as distinct twin daughters of the Creator occurs specifically in the Atharvaveda.
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