पल्लवन
रेखांकित अथवा दी गई पंक्तियों का पल्लवन अथवा भाव पल्लवन कीजिए :
'नर और नारी जन्मते और मरते हैं, परन्तु राष्ट्र सदा अमर रहता है।'
लोभ चाहे जिस वस्तु का हो, जब वह बहुत बढ़ जाता है तब उस वस्तु की प्राप्ति, सात्रिध्य या उपयोग से जी नहीं भरता। मनुष्य चाहता है कि वह बार-बार मिले या बराबर मिलती रहे। धन का लोभ जब रोग होकर चित्त में घर कर लेता है, तब प्राप्ति होने पर भी, और प्राप्ति की इच्छा बराबर बनी रहती है। जिससे मनुष्य सदा आतुर और प्राप्ति के आनन्द से विमुख रहता है। उसका अन्तःकरण सदा अभावग्रस्त रहता है। उसके लिए जो है, वह भी नहीं है। असन्तोष या अभाव कल्पना से उत्पन्न दुःख है। अतः जिस किसी में यह काल्पनिक अभाव या असन्तोष रहेगा, उसका सुख से नाता सब दिन के लिए टूट जाता है।
उत्तर देखेंगुरू से ज्ञान प्राप्त करने के केवल तीन उपाय हैं; नम्रता, जिज्ञासा और सेवा। इनमें नम्रता का स्थान प्रथम है। अतः एक आदर्श विद्यार्थी को विनम्र होना चाहिए। नम्रता के साथ-साथ उसे अनुशासनप्रिय होना चाहिए। जो विद्यार्थी अनुशासनहीन होते हैं, वे अपने देश, अपनी जाति, अपने माता-पिता, अपने और कॉलेज के लिए प्रतिष्ठाकारक होते हैं। अनुशासनहीन छात्र का न तो मानसिक विकास हो पाता है और न ही बौद्धिक विकास। वह उन गुणों से सदैव-सदैव के लिए वंचित हो जाता है, जो मनुष्य को प्रतिष्ठा के अवसर प्रदान करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन का विशेष महत्व है। अनुशासन से ही छात्र आदर्श विद्यार्थी की श्रेणी में आ सकता है। आज के युग का छात्र अनुशासनहीनता दिखाने में अपना गौरव समझता है, इसीलिए देश में सभ्य नागरिकों का अभाव-सा होता चला जा रहा है, क्योंकि आज का विद्यार्थी ही कल का नागरिक बनता है।
उत्तर देखेंरेखांकित अथवा दी गई पंक्तियों का पल्लवन अथवा भाव पल्लवित कीजिए: "मुर्दा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।"
उत्तर देखेंरेखांकित अथवा दी गई पंक्तियों का पल्लवन अथवा भाव पल्लवन कीजिए: नारी का सौन्दर्य आभूषणों से नहीं, सौम्य गुणों से होता है।
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