निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए : "नाटककारों में कालिदास का नाम सर्वप्रथम आता है। उनका अंतिम नाटक अभिज्ञान-शाकुन्तल, जिसकी कथा महाभारत से ली गई है, संस्कृत साहित्य की सर्वोत्कृष्ट रचना मानी जा सकती है। इसे कालिदास की अनुपम उपलब्धि कही जाए तो इसमें अतिशयोक्ति नहीं होगी। विश्व साहित्य में इस नाटक को जो स्थान प्राप्त है वह अब तक किसी भारतीय रचनाकार की पहुँच से परे है। इस नाटक में कालिदास ने भारतीय जीवन के विभिन्न पक्षों का आदर्श रूप चित्रित किया है। उन्होंने शृंगार रस के सुरुचिपूर्ण प्रवाह को काव्य जगत की गौरवशालिनी मर्यादा के भीतर रखकर लोकोत्तर आनन्द की सृष्टि की है।" (A) ऊपर के गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। (B) संस्कृत साहित्य में किस नाटककार का नाम सबसे पहले आता है ? (C) कालिदास के अंतिम नाटक का नाम बताइये। (D) 'अभिज्ञान-शाकुंतल' की कथा किस भारतीय महाकाव्य से ली गई है ? (E) 'अभिज्ञान-शाकुंतल' की विशेषता बताइये।
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
गद्यांश 9(अ) के सभी 5 प्रश्नों के उत्तर:
- (A) ऊपर के गद्यांश का उचित शीर्षक:
महाकवि कालिदास और उनकी कालजयी कृति 'अभिज्ञान-शाकुन्तलम्'। - (B) संस्कृत साहित्य में किस नाटककार का नाम सबसे पहले आता है?
संस्कृत साहित्य के नाटककारों में महाकवि कालिदास का नाम सर्वोपरि और सर्वप्रथम आता है। - (C) कालिदास के अंतिम नाटक का नाम बताइये:
कालिदास के अंतिम एवं सर्वोत्कृष्ट नाटक का नाम 'अभिज्ञान-शाकुन्तलम्' है। - (D) 'अभिज्ञान-शाकुंतल' की कथा किस भारतीय महाकाव्य से ली गई है?
'अभिज्ञान-शाकुन्तल' का मूल कथानक महर्षि वेदव्यास रचित महान भारतीय महाकाव्य 'महाभारत' के आदिपर्व (शकुंतलोपाख्यान) से लिया गया है। - (E) 'अभिज्ञान-शाकुंतल' की विशेषता बताइये:
यह नाटक भारतीय जीवन के उदात्त आदर्शों का सजीव चित्रण करता है तथा इसमें शृंगार रस के सुरुचिपूर्ण प्रवाह को काव्य-मर्यादा के भीतर रखकर लोकोत्तर (अलौकिक) आनंद की सृष्टि की गई है।
हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए : "नाटककारों में कालिदास का नाम सर्वप्रथम आता है। उनका अंतिम नाटक अभिज्ञान-शाकुन्तल, जिसकी कथा महाभारत से ली गई है, संस्कृत साहित्य की सर्वोत्कृष्ट रचना मानी जा सकती है। इसे कालिदास की अनुपम उपलब्धि कही जाए तो इसमें अतिशयोक्ति नहीं होगी। विश्व साहित्य में इस नाटक को जो स्थान प्राप्त है वह अब तक किसी भारतीय रचनाकार की पहुँच से परे है। इस नाटक में कालिदास ने भारतीय जीवन के विभिन्न पक्षों का आदर्श रूप चित्रित किया है। उन्होंने शृंगार रस के सुरुचिपूर्ण प्रवाह को काव्य जगत की गौरवशालिनी मर्यादा के भीतर रखकर लोकोत्तर आनन्द की सृष्टि की है।" (A) ऊपर के गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। (B) संस्कृत साहित्य में किस नाटककार का नाम सबसे पहले आता है ? (C) कालिदास के अंतिम नाटक का नाम बताइये। (D) 'अभिज्ञान-शाकुंतल' की कथा किस भारतीय महाकाव्य से ली गई है ? (E) 'अभिज्ञान-शाकुंतल' की विशेषता बताइये।
गद्यांश 9(अ) के सभी 5 प्रश्नों के उत्तर:
- (A) ऊपर के गद्यांश का उचित शीर्षक:
महाकवि कालिदास और उनकी कालजयी कृति 'अभिज्ञान-शाकुन्तलम्'। - (B) संस्कृत साहित्य में किस नाटककार का नाम सबसे पहले आता है?
संस्कृत साहित्य के नाटककारों में महाकवि कालिदास का नाम सर्वोपरि और सर्वप्रथम आता है। - (C) कालिदास के अंतिम नाटक का नाम बताइये:
कालिदास के अंतिम एवं सर्वोत्कृष्ट नाटक का नाम 'अभिज्ञान-शाकुन्तलम्' है। - (D) 'अभिज्ञान-शाकुंतल' की कथा किस भारतीय महाकाव्य से ली गई है?
'अभिज्ञान-शाकुन्तल' का मूल कथानक महर्षि वेदव्यास रचित महान भारतीय महाकाव्य 'महाभारत' के आदिपर्व (शकुंतलोपाख्यान) से लिया गया है। - (E) 'अभिज्ञान-शाकुंतल' की विशेषता बताइये:
यह नाटक भारतीय जीवन के उदात्त आदर्शों का सजीव चित्रण करता है तथा इसमें शृंगार रस के सुरुचिपूर्ण प्रवाह को काव्य-मर्यादा के भीतर रखकर लोकोत्तर (अलौकिक) आनंद की सृष्टि की गई है।