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निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "पर्यावरण की समस्या : कारण एवं निवारण"

201525M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

पर्यावरण की समस्या : कारण एवं निवारण: पारिस्थितिक असंतुलन, प्रदूषण संकट एवं संधारणीय समाधान

"माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः (यह धरती हमारी माता है और हम सब इसकी संतान हैं); प्रकृति का संरक्षण करना ही मानव अस्तित्व की रक्षा की एकमात्र गारंटी है।"

1. प्रस्तावना एवं पर्यावरणीय संकट की विभीषिका:
21वीं सदी में अनियंत्रित औद्योगीकरण, अंधाधुंध शहरीकरण, वनों की कटाई और अनियंत्रित उपभोक्तावाद ने पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन को गंभीर रूप से बिगाड़ दिया है। ग्लोबल वार्मिंग, ग्लेशियरों का पिघलना, असमय सूखा-बाढ़, वायु-जल प्रदूषण और जैव-विविधता का क्षरण आज केवल विकास की समस्या नहीं, बल्कि समूची मानव जाति के अस्तित्व का महासंकट बन चुका है।

2. पर्यावरण संकट के प्रमुख कारण:

  • जीवाश्म ईंधन एवं ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन: कोयला आधारित बिजलीघरों, कारखानों और वाहनों के धुएं से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड और PM2.5 का खतरनाक स्तर।
  • वनों की अंधाधुंध कटाई: खनन, सड़कों और बांधों के निर्माण हेतु 'धरती के फेफड़े' कहे जाने वाले घने जंगलों को काटना।
  • प्लास्टिक कचरा एवं रसायनों का प्रयोग: कभी नष्ट न होने वाला सिंगल-यूज प्लास्टिक तथा रासायनिक खादों व कीटनाशकों से मिट्टी व भूजल का जहरीला होना।
  • उपभोक्तावादी जीवन-शैली: 'प्रकृति के दोहन' को ही विकास मान लेना।

3. निवारण हेतु ठोस रणनीतिक कार्ययोजना (आगे की राह):

  • हरित एवं अक्षय ऊर्जा का विस्तार: सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा (जैसे म.प्र. का 750 MW रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट), तथा इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाना।
  • अपशिष्ट प्रबंधन एवं इंदौर मॉडल: 100% कचरा पृथक्करण, बायो-सीएनजी (गोवर्धन) प्लांट तथा सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • सघन वृक्षारोपण एवं जैव-विविधता संरक्षण: 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान और 'नगर वन योजना' द्वारा हरित आवरण में वृद्धि।
  • 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE): भारतीय संस्कृति के प्रकृति-अनुकूल संधारणीय जीवन-मूल्यों को अपनाना तथा संविधान के अनुच्छेद 51A(g) के तहत मौलिक कर्तव्य का पालन करना।

4. निष्कर्ष:
पर्यावरण संरक्षण विकास का विरोधी नहीं, बल्कि सतत विकास (Sustainable Development) की अनिवार्य शर्त है। जब हरित तकनीक का संगम जन-जागरूकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता से होगा, तभी हमारी धरती प्रदूषण-मुक्त बनेगी और एक सुरक्षित, समृद्ध व हरित 'विकसित भारत @2047' का निर्माण होगा।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "पर्यावरण की समस्या : कारण एवं निवारण"

पर्यावरण की समस्या : कारण एवं निवारण: पारिस्थितिक असंतुलन, प्रदूषण संकट एवं संधारणीय समाधान

"माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः (यह धरती हमारी माता है और हम सब इसकी संतान हैं); प्रकृति का संरक्षण करना ही मानव अस्तित्व की रक्षा की एकमात्र गारंटी है।"

1. प्रस्तावना एवं पर्यावरणीय संकट की विभीषिका:
21वीं सदी में अनियंत्रित औद्योगीकरण, अंधाधुंध शहरीकरण, वनों की कटाई और अनियंत्रित उपभोक्तावाद ने पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन को गंभीर रूप से बिगाड़ दिया है। ग्लोबल वार्मिंग, ग्लेशियरों का पिघलना, असमय सूखा-बाढ़, वायु-जल प्रदूषण और जैव-विविधता का क्षरण आज केवल विकास की समस्या नहीं, बल्कि समूची मानव जाति के अस्तित्व का महासंकट बन चुका है।

2. पर्यावरण संकट के प्रमुख कारण:

  • जीवाश्म ईंधन एवं ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन: कोयला आधारित बिजलीघरों, कारखानों और वाहनों के धुएं से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड और PM2.5 का खतरनाक स्तर।
  • वनों की अंधाधुंध कटाई: खनन, सड़कों और बांधों के निर्माण हेतु 'धरती के फेफड़े' कहे जाने वाले घने जंगलों को काटना।
  • प्लास्टिक कचरा एवं रसायनों का प्रयोग: कभी नष्ट न होने वाला सिंगल-यूज प्लास्टिक तथा रासायनिक खादों व कीटनाशकों से मिट्टी व भूजल का जहरीला होना।
  • उपभोक्तावादी जीवन-शैली: 'प्रकृति के दोहन' को ही विकास मान लेना।

3. निवारण हेतु ठोस रणनीतिक कार्ययोजना (आगे की राह):

  • हरित एवं अक्षय ऊर्जा का विस्तार: सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा (जैसे म.प्र. का 750 MW रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट), तथा इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाना।
  • अपशिष्ट प्रबंधन एवं इंदौर मॉडल: 100% कचरा पृथक्करण, बायो-सीएनजी (गोवर्धन) प्लांट तथा सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • सघन वृक्षारोपण एवं जैव-विविधता संरक्षण: 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान और 'नगर वन योजना' द्वारा हरित आवरण में वृद्धि।
  • 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE): भारतीय संस्कृति के प्रकृति-अनुकूल संधारणीय जीवन-मूल्यों को अपनाना तथा संविधान के अनुच्छेद 51A(g) के तहत मौलिक कर्तव्य का पालन करना।

4. निष्कर्ष:
पर्यावरण संरक्षण विकास का विरोधी नहीं, बल्कि सतत विकास (Sustainable Development) की अनिवार्य शर्त है। जब हरित तकनीक का संगम जन-जागरूकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता से होगा, तभी हमारी धरती प्रदूषण-मुक्त बनेगी और एक सुरक्षित, समृद्ध व हरित 'विकसित भारत @2047' का निर्माण होगा।

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