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Home›MPPSC Mains (Eng)›General Hindi & Grammar›General Hindi & Grammar›Pallavan / Expansion of Idea (5 marks)›निम्नलिखित गद्यांश का एक-तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए तथा रेखांकित

निम्नलिखित गद्यांश का एक-तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए तथा रेखांकित पंक्तियों का भाव-पल्लवन अपने शब्दों में कीजिए : मनुष्य की प्रकृति में शील और सात्विकता का आदि संस्थापक यही मनोविकार है। मनुष्य की सज्जनता या दुर्जनता अन्य प्राणियों के साथ उसके संबंध या संसर्ग द्वारा ही व्यक्त होती है। यदि कोई मनुष्य जन्म से ही किसी निर्जन स्थान में अपना निर्वाह करे तो उसका कोई कर्म सज्जनता या दुर्जनता की कोटि में नहीं आएगा। उसके सब कर्म निर्लिप्त होंगे। संसार में प्रत्येक प्राणी के जीवन का उद्देश्य दुख की निवृत्ति और सुख की प्राप्ति है। अत: सबके उद्देश्य को एक साथ जोड़ने से संसार का उद्देश्य सुख की स्थापना और दुख का निराकरण हुआ; अत: जिन कर्मों से संसार के उस उद्देश्य के साधन हों, वे उत्तम हैं।

201615M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

संक्षेपण (Précis Writing):

उचित शीर्षक: संतोष: सर्वोत्तम धन एवं सुख का आधार

संक्षेपण:
मानव जीवन में संतोष ही सबसे बड़ा धन और मानसिक शांति का आधार है। असीम तृष्णा और लोभ व्यक्ति को सदा अशांत, दुखी और व्याकुल रखते हैं। भौतिक संपदा चाहे जितनी भी हो, संतोष रूपी धन के सम्मुख सब व्यर्थ सिद्ध होते हैं। संतोषी व्यक्ति ही वास्तविक रूप से सुखी और समृद्ध है।

(मूल शब्द: ~125 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~44 शब्द)

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

निम्नलिखित गद्यांश का एक-तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए तथा रेखांकित पंक्तियों का भाव-पल्लवन अपने शब्दों में कीजिए : मनुष्य की प्रकृति में शील और सात्विकता का आदि संस्थापक यही मनोविकार है। मनुष्य की सज्जनता या दुर्जनता अन्य प्राणियों के साथ उसके संबंध या संसर्ग द्वारा ही व्यक्त होती है। यदि कोई मनुष्य जन्म से ही किसी निर्जन स्थान में अपना निर्वाह करे तो उसका कोई कर्म सज्जनता या दुर्जनता की कोटि में नहीं आएगा। उसके सब कर्म निर्लिप्त होंगे। संसार में प्रत्येक प्राणी के जीवन का उद्देश्य दुख की निवृत्ति और सुख की प्राप्ति है। अत: सबके उद्देश्य को एक साथ जोड़ने से संसार का उद्देश्य सुख की स्थापना और दुख का निराकरण हुआ; अत: जिन कर्मों से संसार के उस उद्देश्य के साधन हों, वे उत्तम हैं।

संक्षेपण (Précis Writing):

उचित शीर्षक: संतोष: सर्वोत्तम धन एवं सुख का आधार

संक्षेपण:
मानव जीवन में संतोष ही सबसे बड़ा धन और मानसिक शांति का आधार है। असीम तृष्णा और लोभ व्यक्ति को सदा अशांत, दुखी और व्याकुल रखते हैं। भौतिक संपदा चाहे जितनी भी हो, संतोष रूपी धन के सम्मुख सब व्यर्थ सिद्ध होते हैं। संतोषी व्यक्ति ही वास्तविक रूप से सुखी और समृद्ध है।

(मूल शब्द: ~125 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~44 शब्द)

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