Home›MPPSC Mains (Eng)›General Hindi & Grammar›General Hindi & Grammar›Pallavan / Expansion of Idea (5 marks)›संसार के श्रेष्ठ मनीषियों ने घोषणा की है कि मनुष्य एक है और इसीलिए

संसार के श्रेष्ठ मनीषियों ने घोषणा की है कि मनुष्य एक है और इसीलिए मूल मानव धर्म भी एक ही है। यह इस युग की आवश्यकता नहीं है, किन्तु युग का अनुभूत सत्य है। पहले भी दीर्घ दृष्टि वाले मनीषियों ने इस बात को अपने-अपने ढंग से कहा था, परन्तु आज यह सत्य अधिक व्यापक होकर अनुभूत हुआ है। इसलिए विभिन्न राष्ट्रीय इकाइयों में पाई जाने वाली संस्कृतियों में और धार्मिक सम्प्रदायों के विश्वासों में समन्वय करने की चर्चा चल पड़ी है। परन्तु समन्वय का अर्थ क्या है ? कुछ लोग धर्मों के नाम पर चलने वाले सभी ऊपरी आचारों को एक साथ जोड़ देने को समन्वय कहने लगे हैं ... मुझे समन्वय की यह नीति ठीक नहीं जँचती। समन्वय में तदुत धर्मों के उन मूल तत्त्वों पर ध्यान रखना आवश्यक है, जिनको केन्द्र करके इन बाह्य आचारों ने रूप ग्रहण किया है।

201615M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

संक्षेपण (Précis Writing):

उचित शीर्षक: मानव एकता एवं विश्व-बंधुत्व की भावना

संक्षेपण:
विश्व के श्रेष्ठ विचारकों ने संपूर्ण मानव जाति की मूलभूत एकता और बंधुत्व की घोषणा की है। बाह्य रंग-रूप, देश, जाति और भाषा के भेद ऊपरी हैं; सबके भीतर एक ही चेतना और मानवीय संवेदना विद्यमान है। परस्पर प्रेम, सद्भाव और सह-अस्तित्व ही मानव समाज के कल्याण का शाश्वत मार्ग है।

(मूल शब्द: ~130 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~45 शब्द)

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

संसार के श्रेष्ठ मनीषियों ने घोषणा की है कि मनुष्य एक है और इसीलिए मूल मानव धर्म भी एक ही है। यह इस युग की आवश्यकता नहीं है, किन्तु युग का अनुभूत सत्य है। पहले भी दीर्घ दृष्टि वाले मनीषियों ने इस बात को अपने-अपने ढंग से कहा था, परन्तु आज यह सत्य अधिक व्यापक होकर अनुभूत हुआ है। इसलिए विभिन्न राष्ट्रीय इकाइयों में पाई जाने वाली संस्कृतियों में और धार्मिक सम्प्रदायों के विश्वासों में समन्वय करने की चर्चा चल पड़ी है। परन्तु समन्वय का अर्थ क्या है ? कुछ लोग धर्मों के नाम पर चलने वाले सभी ऊपरी आचारों को एक साथ जोड़ देने को समन्वय कहने लगे हैं ... मुझे समन्वय की यह नीति ठीक नहीं जँचती। समन्वय में तदुत धर्मों के उन मूल तत्त्वों पर ध्यान रखना आवश्यक है, जिनको केन्द्र करके इन बाह्य आचारों ने रूप ग्रहण किया है।

संक्षेपण (Précis Writing):

उचित शीर्षक: मानव एकता एवं विश्व-बंधुत्व की भावना

संक्षेपण:
विश्व के श्रेष्ठ विचारकों ने संपूर्ण मानव जाति की मूलभूत एकता और बंधुत्व की घोषणा की है। बाह्य रंग-रूप, देश, जाति और भाषा के भेद ऊपरी हैं; सबके भीतर एक ही चेतना और मानवीय संवेदना विद्यमान है। परस्पर प्रेम, सद्भाव और सह-अस्तित्व ही मानव समाज के कल्याण का शाश्वत मार्ग है।

(मूल शब्द: ~130 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~45 शब्द)

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