निम्नलिखित मुहावरों/कहावतों में से किन्हीं पाँच का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए : (i) गिरगिट की तरह रंग बदलना (ii) अंधे की लाठी (iii) जीती मक्खी निगलना (iv) छठी का दूध याद आना (v) नाकों चने चबवाना (vi) अंधे के हाथ बटेर (vii) लोहे के चने चबाना (viii) अधजल गगरी छलकत जाए (ix) छछूँदर के सिर में चमेलो का तेल (x) तू डाल-डाल मैं पात-पात
Model Answer
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
मुहावरों एवं लोकोक्तियों के अर्थ तथा वाक्य प्रयोग:
- (i) गिरगिट की तरह रंग बदलना:
अर्थ: अवसरवादी होना / बात-बात पर अपनी राय या पक्ष बदलना।
वाक्य प्रयोग: राजनीति में नेताओं को अपने स्वार्थ के लिए गिरगिट की तरह रंग बदलते देर नहीं लगती। - (ii) अंधे की लाठी:
अर्थ: एकमात्र सहारा या संबल।
वाक्य प्रयोग: श्रवण कुमार अपने वृद्ध एवं नेत्रहीन माता-पिता के लिए अंधे की लाठी के समान था। - (iii) जीती मक्खी निगलना:
अर्थ: जान-बूझकर कोई अनुचित या गलत कार्य करना / प्रत्यक्ष बुराई को स्वीकारना।
वाक्य प्रयोग: सब जानते हैं कि वह भ्रष्ट है, फिर भी उसे संगठन का अध्यक्ष बनाना जीती मक्खी निगलने जैसा है। - (iv) छठी का दूध याद आना:
अर्थ: घोर संकट में पड़ना / अत्यंत कठिन परिश्रम व कष्ट का अनुभव होना।
वाक्य प्रयोग: जब पहली बार हिमालय की दुर्गम चढ़ाई की, तो सभी पर्वतारोहियों को छठी का दूध याद आ गया। - (v) नाकों चने चबवाना:
अर्थ: बहुत अधिक परेशान या तंग करना / भारी टक्कर देना।
वाक्य प्रयोग: रानी लक्ष्मीबाई ने 1857 के संग्राम में अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिए थे। - (vi) अंधे के हाथ बटेर:
अर्थ: अयोग्य व्यक्ति को बिना प्रयास अनायास कोई मूल्यवान वस्तु या पद मिल जाना।
वाक्य प्रयोग: अल्पज्ञानी व्यक्ति का उच्च पद पर चयन होना तो अंधे के हाथ बटेर लगने जैसा है। - (vii) लोहे के चने चबाना:
अर्थ: अत्यंत कठिन और विषम कार्य करना / कड़ा संघर्ष झेलना।
वाक्य प्रयोग: बिना समर्पण और कठोर परिश्रम के सिविल सेवा परीक्षा पास करना लोहे के चने चबाने के समान है। - (viii) अधजल गगरी छलकत जाए:
अर्थ: अधूरा ज्ञान या कम संपत्ति वाला व्यक्ति बहुत अधिक दिखावा और घमंड करता है।
वाक्य प्रयोग: उसे संगीत की दो पंक्तियाँ आती हैं पर खुद को उस्ताद समझता है; सच है—अधजल गगरी छलकत जाए। - (ix) छछूँदर के सिर में चमेली का तेल:
अर्थ: अनधिकारी या अयोग्य व्यक्ति को किसी उत्तम वस्तु की प्राप्ति होना।
वाक्य प्रयोग: उस अशिष्ट और अनपढ़ व्यक्ति को जब मंत्री का पीए बनाया गया, तो लोगों ने कहा—छछूँदर के सिर में चमेली का तेल। - (x) तू डाल-डाल मैं पात-पात:
अर्थ: एक से बढ़कर एक चालाक होना / सामने वाले की हर चाल से आगे निकलना।
वाक्य प्रयोग: पुलिस ने शातिर चोर से कहा, 'तुम चाहे जितनी चालाकी करो, हम तुम्हें पकड़ ही लेंगे—तू डाल-डाल तो मैं पात-पात।'
हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
निम्नलिखित मुहावरों/कहावतों में से किन्हीं पाँच का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए : (i) गिरगिट की तरह रंग बदलना (ii) अंधे की लाठी (iii) जीती मक्खी निगलना (iv) छठी का दूध याद आना (v) नाकों चने चबवाना (vi) अंधे के हाथ बटेर (vii) लोहे के चने चबाना (viii) अधजल गगरी छलकत जाए (ix) छछूँदर के सिर में चमेलो का तेल (x) तू डाल-डाल मैं पात-पात
मुहावरों एवं लोकोक्तियों के अर्थ तथा वाक्य प्रयोग:
- (i) गिरगिट की तरह रंग बदलना:
अर्थ: अवसरवादी होना / बात-बात पर अपनी राय या पक्ष बदलना।
वाक्य प्रयोग: राजनीति में नेताओं को अपने स्वार्थ के लिए गिरगिट की तरह रंग बदलते देर नहीं लगती। - (ii) अंधे की लाठी:
अर्थ: एकमात्र सहारा या संबल।
वाक्य प्रयोग: श्रवण कुमार अपने वृद्ध एवं नेत्रहीन माता-पिता के लिए अंधे की लाठी के समान था। - (iii) जीती मक्खी निगलना:
अर्थ: जान-बूझकर कोई अनुचित या गलत कार्य करना / प्रत्यक्ष बुराई को स्वीकारना।
वाक्य प्रयोग: सब जानते हैं कि वह भ्रष्ट है, फिर भी उसे संगठन का अध्यक्ष बनाना जीती मक्खी निगलने जैसा है। - (iv) छठी का दूध याद आना:
अर्थ: घोर संकट में पड़ना / अत्यंत कठिन परिश्रम व कष्ट का अनुभव होना।
वाक्य प्रयोग: जब पहली बार हिमालय की दुर्गम चढ़ाई की, तो सभी पर्वतारोहियों को छठी का दूध याद आ गया। - (v) नाकों चने चबवाना:
अर्थ: बहुत अधिक परेशान या तंग करना / भारी टक्कर देना।
वाक्य प्रयोग: रानी लक्ष्मीबाई ने 1857 के संग्राम में अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिए थे। - (vi) अंधे के हाथ बटेर:
अर्थ: अयोग्य व्यक्ति को बिना प्रयास अनायास कोई मूल्यवान वस्तु या पद मिल जाना।
वाक्य प्रयोग: अल्पज्ञानी व्यक्ति का उच्च पद पर चयन होना तो अंधे के हाथ बटेर लगने जैसा है। - (vii) लोहे के चने चबाना:
अर्थ: अत्यंत कठिन और विषम कार्य करना / कड़ा संघर्ष झेलना।
वाक्य प्रयोग: बिना समर्पण और कठोर परिश्रम के सिविल सेवा परीक्षा पास करना लोहे के चने चबाने के समान है। - (viii) अधजल गगरी छलकत जाए:
अर्थ: अधूरा ज्ञान या कम संपत्ति वाला व्यक्ति बहुत अधिक दिखावा और घमंड करता है।
वाक्य प्रयोग: उसे संगीत की दो पंक्तियाँ आती हैं पर खुद को उस्ताद समझता है; सच है—अधजल गगरी छलकत जाए। - (ix) छछूँदर के सिर में चमेली का तेल:
अर्थ: अनधिकारी या अयोग्य व्यक्ति को किसी उत्तम वस्तु की प्राप्ति होना।
वाक्य प्रयोग: उस अशिष्ट और अनपढ़ व्यक्ति को जब मंत्री का पीए बनाया गया, तो लोगों ने कहा—छछूँदर के सिर में चमेली का तेल। - (x) तू डाल-डाल मैं पात-पात:
अर्थ: एक से बढ़कर एक चालाक होना / सामने वाले की हर चाल से आगे निकलना।
वाक्य प्रयोग: पुलिस ने शातिर चोर से कहा, 'तुम चाहे जितनी चालाकी करो, हम तुम्हें पकड़ ही लेंगे—तू डाल-डाल तो मैं पात-पात।'