स्वर संधि का तात्पर्य क्या है ?
Model Answer
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
स्वर संधि का तात्पर्य एवं भेद:
1. तात्पर्य: दो स्वरों के अत्यंत समीप आने पर उनके पारस्परिक मेल से जो ध्वनि-विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे 'स्वर संधि' कहते हैं।
2. स्वर संधि के 5 भेद:
- दीर्घ स्वर संधि (उदा. विद्या + आलय = विद्यालय)
- गुण स्वर संधि (उदा. महा + उत्सव = महोत्सव)
- वृद्धि स्वर संधि (उदा. एक + एक = एकैक)
- यण् स्वर संधि (उदा. अति + अधिक = अत्यधिक)
- अयादि स्वर संधि (उदा. पौ + अन = पवन)
हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
स्वर संधि का तात्पर्य क्या है ?
स्वर संधि का तात्पर्य एवं भेद:
1. तात्पर्य: दो स्वरों के अत्यंत समीप आने पर उनके पारस्परिक मेल से जो ध्वनि-विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे 'स्वर संधि' कहते हैं।
2. स्वर संधि के 5 भेद:
- दीर्घ स्वर संधि (उदा. विद्या + आलय = विद्यालय)
- गुण स्वर संधि (उदा. महा + उत्सव = महोत्सव)
- वृद्धि स्वर संधि (उदा. एक + एक = एकैक)
- यण् स्वर संधि (उदा. अति + अधिक = अत्यधिक)
- अयादि स्वर संधि (उदा. पौ + अन = पवन)