Home›MPPSC Mains (Eng)›General Hindi & Grammar›General Hindi & Grammar›Pallavan / Expansion of Idea (5 marks)›निम्नलिखित गद्यांश का एक-तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए तथा रेखांकित

निम्नलिखित गद्यांश का एक-तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए तथा रेखांकित पंक्तियों का भाव-पल्लवन अपने शब्दों में कीजिए :

हमारे शास्त्रों में धर्म का जहाँ भी प्रसंग आया है, बड़ी रोचक और स्पष्ट व्याख्या की गई है तब भी धर्म को गूढ़ बतलाया गया है। गूढ़ अर्थात् रहस्यों से भरा हुआ। कई प्रसंग ऐसे भी आए जहाँ बड़े-बड़े ज्ञानी भी धर्म को सही ढंग से परिभाषित करने में चूक गए। उन्हें मौन होना पड़ा। महाभारत का एक बड़ा ही मर्मस्पर्शी प्रसंग है। युधिष्ठिर जब पाँचों भाइयों सहित स्वयं को जुए में हार गए तब क्या उन्हें द्रौपदी को भी दाव पर रखने का अधिकार था ? इस विषय पर भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और विदुर जैसे महाज्ञानी भी मौन होकर देखते रहे। दाव पर रखी गई द्रौपदी का सभा में चीर हरण होता रहा। विकर्ण ने इस बात का सिर्फ विरोध ही नहीं किया, अपितु अपने विवेक के अनुसार उसने धर्म को परिभाषित करने का भी प्रयास किया। अपने इतने ही संक्षिप्त चरित्र के कारण महाभारत का पात्र विकर्ण अमर हो गया।

201715M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

संक्षेपण (Précis Writing):

उचित शीर्षक: साहित्य का सामाजिक दायित्व एवं मार्गदर्शक भूमिका

संक्षेपण:
साहित्य केवल समाज की वर्तमान दशा का प्रतिबिम्ब ही नहीं प्रस्तुत करता, अपितु वह समाज को नई दिशा, उच्च आदर्श और नवजीवन देने वाला मार्गदर्शक भी है। युग-परिवर्तन और जन-चेतना के जागरण में साहित्यकार की लेखनी सर्वाधिक प्रभावशाली शक्ति सिद्ध होती है।

(मूल शब्द: ~135 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~46 शब्द)

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

निम्नलिखित गद्यांश का एक-तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए तथा रेखांकित पंक्तियों का भाव-पल्लवन अपने शब्दों में कीजिए :

हमारे शास्त्रों में धर्म का जहाँ भी प्रसंग आया है, बड़ी रोचक और स्पष्ट व्याख्या की गई है तब भी धर्म को गूढ़ बतलाया गया है। गूढ़ अर्थात् रहस्यों से भरा हुआ। कई प्रसंग ऐसे भी आए जहाँ बड़े-बड़े ज्ञानी भी धर्म को सही ढंग से परिभाषित करने में चूक गए। उन्हें मौन होना पड़ा। महाभारत का एक बड़ा ही मर्मस्पर्शी प्रसंग है। युधिष्ठिर जब पाँचों भाइयों सहित स्वयं को जुए में हार गए तब क्या उन्हें द्रौपदी को भी दाव पर रखने का अधिकार था ? इस विषय पर भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और विदुर जैसे महाज्ञानी भी मौन होकर देखते रहे। दाव पर रखी गई द्रौपदी का सभा में चीर हरण होता रहा। विकर्ण ने इस बात का सिर्फ विरोध ही नहीं किया, अपितु अपने विवेक के अनुसार उसने धर्म को परिभाषित करने का भी प्रयास किया। अपने इतने ही संक्षिप्त चरित्र के कारण महाभारत का पात्र विकर्ण अमर हो गया।

संक्षेपण (Précis Writing):

उचित शीर्षक: साहित्य का सामाजिक दायित्व एवं मार्गदर्शक भूमिका

संक्षेपण:
साहित्य केवल समाज की वर्तमान दशा का प्रतिबिम्ब ही नहीं प्रस्तुत करता, अपितु वह समाज को नई दिशा, उच्च आदर्श और नवजीवन देने वाला मार्गदर्शक भी है। युग-परिवर्तन और जन-चेतना के जागरण में साहित्यकार की लेखनी सर्वाधिक प्रभावशाली शक्ति सिद्ध होती है।

(मूल शब्द: ~135 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~46 शब्द)

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