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Home›MPPSC Mains (Eng)›General Hindi & Grammar›General Hindi & Grammar›Unseen Passage (18 marks)›निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

प्रत्येक राष्ट्र की अपनी एक सांस्कृतिक धरोहर होती है जिसके बल पर वह प्रगति के पथ पर अग्रसर होता रहता है। मानव युग-युग से अपने जीवन को अधिक सुखमय, उपयोगी, शांतिमय और आनंदपूर्ण बनाने का प्रयत्न करता रहा है। इस प्रयास का आधार वह सांस्कृतिक धरोहर होती है जो प्रत्येक मानव को विरासत के रूप में मिलती है और इस प्रयास के फलस्वरूप मानव अपना विकास करता है। कुछ लोग सभ्यता और संस्कृति को एक ही मानते हैं। यह उनकी भूल है। यूँ तो संस्कृति और सभ्यता में घनिष्ठ संबंध है; किंतु संस्कृति मानव जीवन को श्रेष्ठ एवं उन्नत बनाने की साधना का नाम है और सभ्यता उन साधनाओं के फलस्वरूप उपलब्ध हुई जीवन-प्रणाली का नाम है। सभ्यता के भीतर बहने वाली विचारधारा को हम संस्कृति कह सकते हैं। किसी राष्ट्र की सभ्यता का मूल्यांकन हम उसकी संस्कृति के आधार पर कर सकते हैं।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ii) सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है ?
(iii) मानव अपना विकास कैसे कर पाता है ?
(iv) संस्कृति क्या है ?
(v) किसी राष्ट्र की सभ्यता का मूल्यांकन हम कैसे कर सकते हैं ?

201715M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

गद्यांश 9(अ) के सभी प्रश्नों के उत्तर:

  1. (i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक:
    संस्कृति और सभ्यता: स्वरूप एवं अंतरसंबंध।
  2. (ii) सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है?
    संस्कृति मानव जीवन को श्रेष्ठ, परिष्कृत एवं उन्नत बनाने की आंतरिक साधना और विचारधारा है; जबकि सभ्यता उन साधनाओं और प्रयासों के फलस्वरूप उपलब्ध हुई बाह्य जीवन-प्रणाली, भौतिक व्यवस्था एवं साधनों का नाम है।
  3. (iii) मानव अपना विकास कैसे कर पाता है?
    मानव को विरासत में मिली सांस्कृतिक धरोहर और अपने जीवन को सुखमय, उपयोगी, शांतिमय व आनंदपूर्ण बनाने के सतत प्रयासों के बल पर ही अपना विकास कर पाता है।
  4. (iv) संस्कृति क्या है?
    संस्कृति मानव जीवन को उच्च मानवीय मूल्यों, संस्कारों और ज्ञान से परिष्कृत करने वाली आंतरिक जीवन-साधना तथा सभ्यता के भीतर अनवरत प्रवाहित होने वाली मूल विचारधारा है।
  5. (v) किसी राष्ट्र की सभ्यता का मूल्यांकन हम कैसे कर सकते हैं?
    किसी राष्ट्र की सभ्यता का वास्तविक और प्रामाणिक मूल्यांकन उसकी सांस्कृतिक धरोहर, वैचारिक श्रेष्ठता और जीवन-मूल्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

प्रत्येक राष्ट्र की अपनी एक सांस्कृतिक धरोहर होती है जिसके बल पर वह प्रगति के पथ पर अग्रसर होता रहता है। मानव युग-युग से अपने जीवन को अधिक सुखमय, उपयोगी, शांतिमय और आनंदपूर्ण बनाने का प्रयत्न करता रहा है। इस प्रयास का आधार वह सांस्कृतिक धरोहर होती है जो प्रत्येक मानव को विरासत के रूप में मिलती है और इस प्रयास के फलस्वरूप मानव अपना विकास करता है। कुछ लोग सभ्यता और संस्कृति को एक ही मानते हैं। यह उनकी भूल है। यूँ तो संस्कृति और सभ्यता में घनिष्ठ संबंध है; किंतु संस्कृति मानव जीवन को श्रेष्ठ एवं उन्नत बनाने की साधना का नाम है और सभ्यता उन साधनाओं के फलस्वरूप उपलब्ध हुई जीवन-प्रणाली का नाम है। सभ्यता के भीतर बहने वाली विचारधारा को हम संस्कृति कह सकते हैं। किसी राष्ट्र की सभ्यता का मूल्यांकन हम उसकी संस्कृति के आधार पर कर सकते हैं।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ii) सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है ?
(iii) मानव अपना विकास कैसे कर पाता है ?
(iv) संस्कृति क्या है ?
(v) किसी राष्ट्र की सभ्यता का मूल्यांकन हम कैसे कर सकते हैं ?

गद्यांश 9(अ) के सभी प्रश्नों के उत्तर:

  1. (i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक:
    संस्कृति और सभ्यता: स्वरूप एवं अंतरसंबंध।
  2. (ii) सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है?
    संस्कृति मानव जीवन को श्रेष्ठ, परिष्कृत एवं उन्नत बनाने की आंतरिक साधना और विचारधारा है; जबकि सभ्यता उन साधनाओं और प्रयासों के फलस्वरूप उपलब्ध हुई बाह्य जीवन-प्रणाली, भौतिक व्यवस्था एवं साधनों का नाम है।
  3. (iii) मानव अपना विकास कैसे कर पाता है?
    मानव को विरासत में मिली सांस्कृतिक धरोहर और अपने जीवन को सुखमय, उपयोगी, शांतिमय व आनंदपूर्ण बनाने के सतत प्रयासों के बल पर ही अपना विकास कर पाता है।
  4. (iv) संस्कृति क्या है?
    संस्कृति मानव जीवन को उच्च मानवीय मूल्यों, संस्कारों और ज्ञान से परिष्कृत करने वाली आंतरिक जीवन-साधना तथा सभ्यता के भीतर अनवरत प्रवाहित होने वाली मूल विचारधारा है।
  5. (v) किसी राष्ट्र की सभ्यता का मूल्यांकन हम कैसे कर सकते हैं?
    किसी राष्ट्र की सभ्यता का वास्तविक और प्रामाणिक मूल्यांकन उसकी सांस्कृतिक धरोहर, वैचारिक श्रेष्ठता और जीवन-मूल्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
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