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निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "बेरोजगारी की समस्या"

201825M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

बेरोजगारी की समस्या: संरचनात्मक कारण, जनसांख्यिकीय लाभांश एवं रोजगार सृजन की रणनीतियाँ

"बेरोजगारी केवल आर्थिक आंकड़ों का नुकसान नहीं है, बल्कि यह युवा शक्ति के सपनों का अवसाद, प्रतिभा का अपव्यय और सामाजिक अशांति का सबसे बड़ा कारण है।"

1. प्रस्तावना एवं समस्या की गंभीरता:
बेरोजगारी उस सामाजिक-आर्थिक स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई कार्यशील, सक्षम और कार्य करने का इच्छुक व्यक्ति प्रचलित मजदूरी दर पर रोजगार प्राप्त करने में असमर्थ रहता है। भारत आज 65% से अधिक युवा जनसंख्या के साथ विश्व का सबसे युवा देश है। यह युवा शक्ति यदि उत्पादक कार्यों में नियोजित हो, तो भारत को अभूतपूर्व 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) प्राप्त होगा; किन्तु यदि यह ऊर्जा बेरोजगार रही, तो यह सामाजिक असंतोष, अपराध और मानसिक अवसाद को जन्म दे सकती है।

2. भारत में बेरोजगारी के प्रमुख कारण एवं स्वरूप:

  • कौशल अंतराल एवं शिक्षित बेरोजगारी: पारंपरिक महाविद्यालयीन डिग्रियों और आधुनिक उद्योगों (AI, डेटा साइंस, ऑटोमेशन) की मांग के मध्य गहरा अंतर।
  • कृषि में प्रच्छन्न (अदृश्य) बेरोजगारी: देश की 45% से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है, जहाँ आवश्यकता से अधिक लोग लगे हुए हैं और उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य है।
  • श्रम-प्रधान उद्योगों का अभाव: विनिर्माण क्षेत्र (कपड़ा, चमड़ा, खाद्य प्रसंस्करण) का अपेक्षित विस्तार न होना।
  • स्वरोजगार हेतु पूंजी व मार्गदर्शन की कमी: युवाओं में केवल सरकारी नौकरियों के प्रति आकर्षण तथा उद्यमशीलता का अभाव।

3. समाधान हेतु रणनीतिक कार्ययोजना (आगे की राह):

  • व्यावसायिक शिक्षा का अनिवार्य अंग (NEP 2020): स्कूली स्तर से ही कोडिंग, तकनीकी कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • मध्य प्रदेश के अभिनव प्रयास:
    • मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना (MMSKY): उद्योगों में कार्य प्रशिक्षण के साथ ₹8,000 से ₹10,000 मासिक मानदेय।
    • मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना: युवाओं को ₹50 लाख तक का कोलेटरल-फ्री ऋण व ब्याज अनुदान।
  • 'नौकरी मांगने वाले' से 'नौकरी देने वाले' का निर्माण: स्टार्टअप इंडिया, मुद्रा ऋण और एमएसएमई क्लस्टर्स द्वारा स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा देना।

4. निष्कर्ष:
हाथों को हुनर और काम मिलना ही किसी राष्ट्र के विकास की सच्ची कसौटी है। कौशल विकास, औद्योगिक निवेश और उद्यमशीलता के समन्वित प्रयासों से ही भारत अपनी युवा शक्ति का पूर्ण सदुपयोग कर सकेगा और 'आत्मनिर्भर भारत' से 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को सिद्ध करेगा।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "बेरोजगारी की समस्या"

बेरोजगारी की समस्या: संरचनात्मक कारण, जनसांख्यिकीय लाभांश एवं रोजगार सृजन की रणनीतियाँ

"बेरोजगारी केवल आर्थिक आंकड़ों का नुकसान नहीं है, बल्कि यह युवा शक्ति के सपनों का अवसाद, प्रतिभा का अपव्यय और सामाजिक अशांति का सबसे बड़ा कारण है।"

1. प्रस्तावना एवं समस्या की गंभीरता:
बेरोजगारी उस सामाजिक-आर्थिक स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई कार्यशील, सक्षम और कार्य करने का इच्छुक व्यक्ति प्रचलित मजदूरी दर पर रोजगार प्राप्त करने में असमर्थ रहता है। भारत आज 65% से अधिक युवा जनसंख्या के साथ विश्व का सबसे युवा देश है। यह युवा शक्ति यदि उत्पादक कार्यों में नियोजित हो, तो भारत को अभूतपूर्व 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) प्राप्त होगा; किन्तु यदि यह ऊर्जा बेरोजगार रही, तो यह सामाजिक असंतोष, अपराध और मानसिक अवसाद को जन्म दे सकती है।

2. भारत में बेरोजगारी के प्रमुख कारण एवं स्वरूप:

  • कौशल अंतराल एवं शिक्षित बेरोजगारी: पारंपरिक महाविद्यालयीन डिग्रियों और आधुनिक उद्योगों (AI, डेटा साइंस, ऑटोमेशन) की मांग के मध्य गहरा अंतर।
  • कृषि में प्रच्छन्न (अदृश्य) बेरोजगारी: देश की 45% से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है, जहाँ आवश्यकता से अधिक लोग लगे हुए हैं और उनकी सीमांत उत्पादकता शून्य है।
  • श्रम-प्रधान उद्योगों का अभाव: विनिर्माण क्षेत्र (कपड़ा, चमड़ा, खाद्य प्रसंस्करण) का अपेक्षित विस्तार न होना।
  • स्वरोजगार हेतु पूंजी व मार्गदर्शन की कमी: युवाओं में केवल सरकारी नौकरियों के प्रति आकर्षण तथा उद्यमशीलता का अभाव।

3. समाधान हेतु रणनीतिक कार्ययोजना (आगे की राह):

  • व्यावसायिक शिक्षा का अनिवार्य अंग (NEP 2020): स्कूली स्तर से ही कोडिंग, तकनीकी कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • मध्य प्रदेश के अभिनव प्रयास:
    • मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना (MMSKY): उद्योगों में कार्य प्रशिक्षण के साथ ₹8,000 से ₹10,000 मासिक मानदेय।
    • मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना: युवाओं को ₹50 लाख तक का कोलेटरल-फ्री ऋण व ब्याज अनुदान।
  • 'नौकरी मांगने वाले' से 'नौकरी देने वाले' का निर्माण: स्टार्टअप इंडिया, मुद्रा ऋण और एमएसएमई क्लस्टर्स द्वारा स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा देना।

4. निष्कर्ष:
हाथों को हुनर और काम मिलना ही किसी राष्ट्र के विकास की सच्ची कसौटी है। कौशल विकास, औद्योगिक निवेश और उद्यमशीलता के समन्वित प्रयासों से ही भारत अपनी युवा शक्ति का पूर्ण सदुपयोग कर सकेगा और 'आत्मनिर्भर भारत' से 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को सिद्ध करेगा।

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