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निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "भारत की सांस्कृतिक एकता"

201825M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

भारत की सांस्कृतिक एकता: 'विविधता में एकता' का शाश्वत दर्शन, तीर्थ परंपरा एवं सामासिक संस्कृति

"उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र संततिः॥"
— विष्णु पुराण
(समुद्र के उत्तर और हिमालय के दक्षिण में जो पावन भूभाग स्थित है, उसका नाम 'भारत' है और हम सब उसकी संतानें 'भारती' हैं।)
"भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसके सांस्कृतिक इंद्रधनुष की सबसे बड़ी शक्ति है।"

1. प्रस्तावना एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीयता का स्वरूप:
भारत केवल भूभागों और सीमाओं का राजनीतिक समुच्चय नहीं, बल्कि सहस्रों वर्षों से जीवंत एक 'सांस्कृतिक राष्ट्र' है। कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक खान-पान, वेशभूषा, भाषा और जलवायु की बाह्य भिन्नताओं के बावजूद भारत की अंतरात्मा एक है। 'विविधता में एकता' (Unity in Diversity) का यही अद्वितीय सौंदर्य भारत को विश्व में सबसे अनूठा और अजेय बनाता है।

2. भारत की सांस्कृतिक एकता के प्रमुख आधार-स्तंभ:

  • आदि शंकराचार्य की तीर्थ परंपरा एवं चार धाम:
    आदि शंकराचार्य ने देश के चारों कोनों में चार पीठों—उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और पश्चिम में द्वारका—की स्थापना कर संपूर्ण भारत को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सूत्र में बांधा।
  • महाकुंभ एवं सर्व-समावेशी उत्सव:
    उज्जैन (मध्य प्रदेश), प्रयागराज, हरिद्वार और नासिक में आयोजित होने वाला 'कुंभ मेला' उत्तर से दक्षिण के करोड़ों भारतीयों के सांस्कृतिक संगम का विश्वविख्यात महापर्व है।
  • सांस्कृतिक व साहित्यिक एकता:
    रामायण और महाभारत का प्रभाव देश की प्रत्येक भाषा (तमिल में कंबन, बांग्ला में कृत्तिवास, अवधी में तुलसीदास) में समान रूप से विद्यमान है। भरतमुनि का 'नाट्यशास्त्र' उत्तर के कत्थक से लेकर दक्षिण के भरतनाट्यम और कत्थकली तक की साझी आत्मा है।
  • सार्वभौमिक जीवन-दर्शन:
    'वसुधैव कुटुम्बकम्' (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) तथा 'सर्वधर्म समभाव' का दर्शन, जिसमें वैदिक, बौद्ध, जैन, भक्ति और सूफी परंपराओं का अद्भुत समन्वय है।

3. मध्य प्रदेश: सांस्कृतिक समन्वय का हृदय-स्थल:
मध्य प्रदेश देश का हृदय स्थल है, जहाँ मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, बघेलखंड और गोंडवाना की लोक-संस्कृतियों का संगम होता है। साँची के स्तूप, खजुराहो के मंदिर, तथा ग्वालियर का तानसेन समारोह भारत की साझी विरासत के जीवंत उदाहरण हैं।

4. निष्कर्ष:
सांस्कृतिक एकता भारत की संप्रभुता और अखंडता की सबसे मजबूत ढाल है। 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के संकल्प को साकार कर तथा अपनी 'विरासत पर गर्व' की अनुभूति कर हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत कर सकते हैं, जो 'विकसित भारत @2047' के निर्माण का सर्वोच्च आधार है।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

निम्नलिखित विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए : "भारत की सांस्कृतिक एकता"

भारत की सांस्कृतिक एकता: 'विविधता में एकता' का शाश्वत दर्शन, तीर्थ परंपरा एवं सामासिक संस्कृति

"उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र संततिः॥"
— विष्णु पुराण
(समुद्र के उत्तर और हिमालय के दक्षिण में जो पावन भूभाग स्थित है, उसका नाम 'भारत' है और हम सब उसकी संतानें 'भारती' हैं।)
"भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसके सांस्कृतिक इंद्रधनुष की सबसे बड़ी शक्ति है।"

1. प्रस्तावना एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीयता का स्वरूप:
भारत केवल भूभागों और सीमाओं का राजनीतिक समुच्चय नहीं, बल्कि सहस्रों वर्षों से जीवंत एक 'सांस्कृतिक राष्ट्र' है। कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक खान-पान, वेशभूषा, भाषा और जलवायु की बाह्य भिन्नताओं के बावजूद भारत की अंतरात्मा एक है। 'विविधता में एकता' (Unity in Diversity) का यही अद्वितीय सौंदर्य भारत को विश्व में सबसे अनूठा और अजेय बनाता है।

2. भारत की सांस्कृतिक एकता के प्रमुख आधार-स्तंभ:

  • आदि शंकराचार्य की तीर्थ परंपरा एवं चार धाम:
    आदि शंकराचार्य ने देश के चारों कोनों में चार पीठों—उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और पश्चिम में द्वारका—की स्थापना कर संपूर्ण भारत को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सूत्र में बांधा।
  • महाकुंभ एवं सर्व-समावेशी उत्सव:
    उज्जैन (मध्य प्रदेश), प्रयागराज, हरिद्वार और नासिक में आयोजित होने वाला 'कुंभ मेला' उत्तर से दक्षिण के करोड़ों भारतीयों के सांस्कृतिक संगम का विश्वविख्यात महापर्व है।
  • सांस्कृतिक व साहित्यिक एकता:
    रामायण और महाभारत का प्रभाव देश की प्रत्येक भाषा (तमिल में कंबन, बांग्ला में कृत्तिवास, अवधी में तुलसीदास) में समान रूप से विद्यमान है। भरतमुनि का 'नाट्यशास्त्र' उत्तर के कत्थक से लेकर दक्षिण के भरतनाट्यम और कत्थकली तक की साझी आत्मा है।
  • सार्वभौमिक जीवन-दर्शन:
    'वसुधैव कुटुम्बकम्' (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) तथा 'सर्वधर्म समभाव' का दर्शन, जिसमें वैदिक, बौद्ध, जैन, भक्ति और सूफी परंपराओं का अद्भुत समन्वय है।

3. मध्य प्रदेश: सांस्कृतिक समन्वय का हृदय-स्थल:
मध्य प्रदेश देश का हृदय स्थल है, जहाँ मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, बघेलखंड और गोंडवाना की लोक-संस्कृतियों का संगम होता है। साँची के स्तूप, खजुराहो के मंदिर, तथा ग्वालियर का तानसेन समारोह भारत की साझी विरासत के जीवंत उदाहरण हैं।

4. निष्कर्ष:
सांस्कृतिक एकता भारत की संप्रभुता और अखंडता की सबसे मजबूत ढाल है। 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के संकल्प को साकार कर तथा अपनी 'विरासत पर गर्व' की अनुभूति कर हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत कर सकते हैं, जो 'विकसित भारत @2047' के निर्माण का सर्वोच्च आधार है।

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