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Home›MPPSC Mains (Eng)›General Hindi & Grammar›General Hindi & Grammar›Unseen Passage (18 marks)›अथवा: समाज की सेवा अपनी सेवा है। हम समाज से अलग नहीं। समाज को स्वच्छ

अथवा: समाज की सेवा अपनी सेवा है। हम समाज से अलग नहीं। समाज को स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है... [passage on society and social service]। प्रश्न: (i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए। (ii) व्यक्ति और समाज का क्या संबंध है? (iii) संगति का प्रभाव व्यक्ति पर क्या पड़ता है? (iv) अपने को सुखी रखने के लिए हमें क्या करना पड़ेगा? (v) समाज सेवा को लेकर लोगों की क्या शिकायत है? और वह क्यों निराधार है?

201915M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

गद्यांश 9(ब) के सभी प्रश्नों के उत्तर:

  1. (i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक:
    समाज-सेवा: व्यक्तिगत सुख एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का आधार।
  2. (ii) व्यक्ति और समाज का क्या संबंध है?
    व्यक्ति और समाज एक-दूसरे से अभिन्न और अविभाज्य हैं। व्यक्ति समाज का ही अंग है; समाज की उन्नति में ही व्यक्ति की उन्नति और समाज की सेवा में ही अपनी वास्तविक सेवा निहित है।
  3. (iii) संगति का प्रभाव व्यक्ति पर क्या पड़ता है?
    संगति का व्यक्ति के चरित्र, विचारों और आदतों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जिस प्रकार का वातावरण और परिवेश समाज में होगा, व्यक्ति का मानसिक व नैतिक विकास भी उसी के अनुरूप होगा।
  4. (iv) अपने को सुखी रखने के लिए हमें क्या करना पड़ेगा?
    स्वयं को सुखी और स्वस्थ रखने के लिए हमें अपने चारों ओर के समाज और परिवेश को स्वच्छ, स्वस्थ, सुरक्षित और सुखी बनाना होगा, क्योंकि अस्वस्थ समाज में कोई अकेला सुखी नहीं रह सकता।
  5. (v) समाज सेवा को लेकर लोगों की क्या शिकायत है? और वह क्यों निराधार है?
    लोगों की यह शिकायत होती है कि समाज सेवा के लिए उनके पास 'समय और साधन' नहीं हैं। यह शिकायत इसलिए निराधार है क्योंकि समाज सेवा के लिए किसी बड़े धन या अलग समय की नहीं, बल्कि अपने दैनिक आचरण में स्वच्छता, परोपकार और नागरिक कर्तव्यों के पालन की आवश्यकता होती है।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

अथवा: समाज की सेवा अपनी सेवा है। हम समाज से अलग नहीं। समाज को स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है... [passage on society and social service]। प्रश्न: (i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए। (ii) व्यक्ति और समाज का क्या संबंध है? (iii) संगति का प्रभाव व्यक्ति पर क्या पड़ता है? (iv) अपने को सुखी रखने के लिए हमें क्या करना पड़ेगा? (v) समाज सेवा को लेकर लोगों की क्या शिकायत है? और वह क्यों निराधार है?

गद्यांश 9(ब) के सभी प्रश्नों के उत्तर:

  1. (i) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक:
    समाज-सेवा: व्यक्तिगत सुख एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का आधार।
  2. (ii) व्यक्ति और समाज का क्या संबंध है?
    व्यक्ति और समाज एक-दूसरे से अभिन्न और अविभाज्य हैं। व्यक्ति समाज का ही अंग है; समाज की उन्नति में ही व्यक्ति की उन्नति और समाज की सेवा में ही अपनी वास्तविक सेवा निहित है।
  3. (iii) संगति का प्रभाव व्यक्ति पर क्या पड़ता है?
    संगति का व्यक्ति के चरित्र, विचारों और आदतों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जिस प्रकार का वातावरण और परिवेश समाज में होगा, व्यक्ति का मानसिक व नैतिक विकास भी उसी के अनुरूप होगा।
  4. (iv) अपने को सुखी रखने के लिए हमें क्या करना पड़ेगा?
    स्वयं को सुखी और स्वस्थ रखने के लिए हमें अपने चारों ओर के समाज और परिवेश को स्वच्छ, स्वस्थ, सुरक्षित और सुखी बनाना होगा, क्योंकि अस्वस्थ समाज में कोई अकेला सुखी नहीं रह सकता।
  5. (v) समाज सेवा को लेकर लोगों की क्या शिकायत है? और वह क्यों निराधार है?
    लोगों की यह शिकायत होती है कि समाज सेवा के लिए उनके पास 'समय और साधन' नहीं हैं। यह शिकायत इसलिए निराधार है क्योंकि समाज सेवा के लिए किसी बड़े धन या अलग समय की नहीं, बल्कि अपने दैनिक आचरण में स्वच्छता, परोपकार और नागरिक कर्तव्यों के पालन की आवश्यकता होती है।
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