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Home›MPPSC Mains (Eng)›General Hindi & Grammar›General Hindi & Grammar›Pallavan / Expansion of Idea (5 marks)›अथवा 'नर और नारी जन्मते हैं और मरते हैं किन्तु राष्ट्र सदैव अमर रहता

अथवा
'नर और नारी जन्मते हैं और मरते हैं किन्तु राष्ट्र सदैव अमर रहता है ।'

202010M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

भाव पल्लवन (Expansion of Idea):

सूक्ति: "नर और नारी जन्मते हैं और मरते हैं किन्तु राष्ट्र सदैव अमर रहता है।"

पल्लवन:
व्यक्ति नश्वर है, जबकि राष्ट्र एक शाश्वत, अविनाशी और सांस्कृतिक-भौगोलिक सत्ता है। काल के अनवरत प्रवाह में असंख्य पीढ़ियों के नर-नारी जन्म लेते हैं, अपनी भूमिका निभाते हैं और मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं; किन्तु उनकी साझी संस्कृति, त्याग, गौरव और सामूहिक चेतना से निर्मित 'राष्ट्र' युगों-युगों तक अक्षुण्ण और अमर बना रहता है।

राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि वहाँ के नागरिकों की अमर आत्मा और सांस्कृतिक अस्मिता है। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई, सरदार भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे हुतात्माओं ने अपने नश्वर शरीरों का बलिदान इसलिए दिया ताकि उनका 'राष्ट्र' सदैव स्वतंत्र, उन्नत और अमर रहे। व्यक्ति राष्ट्र का एक क्षणिक अंश है, जबकि राष्ट्र वह विराट वृक्ष है जिसकी छाया में अनंत पीढ़ियाँ आश्रय पाती हैं।

अतः प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है कि वह अपने संकीर्ण स्वार्थों और व्यक्तिगत अस्तित्व से ऊपर उठकर राष्ट्र-हित को सर्वोपरि माने और राष्ट्र के अमर गौरव के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने को तत्पर रहे।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

अथवा
'नर और नारी जन्मते हैं और मरते हैं किन्तु राष्ट्र सदैव अमर रहता है ।'

भाव पल्लवन (Expansion of Idea):

सूक्ति: "नर और नारी जन्मते हैं और मरते हैं किन्तु राष्ट्र सदैव अमर रहता है।"

पल्लवन:
व्यक्ति नश्वर है, जबकि राष्ट्र एक शाश्वत, अविनाशी और सांस्कृतिक-भौगोलिक सत्ता है। काल के अनवरत प्रवाह में असंख्य पीढ़ियों के नर-नारी जन्म लेते हैं, अपनी भूमिका निभाते हैं और मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं; किन्तु उनकी साझी संस्कृति, त्याग, गौरव और सामूहिक चेतना से निर्मित 'राष्ट्र' युगों-युगों तक अक्षुण्ण और अमर बना रहता है।

राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि वहाँ के नागरिकों की अमर आत्मा और सांस्कृतिक अस्मिता है। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई, सरदार भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे हुतात्माओं ने अपने नश्वर शरीरों का बलिदान इसलिए दिया ताकि उनका 'राष्ट्र' सदैव स्वतंत्र, उन्नत और अमर रहे। व्यक्ति राष्ट्र का एक क्षणिक अंश है, जबकि राष्ट्र वह विराट वृक्ष है जिसकी छाया में अनंत पीढ़ियाँ आश्रय पाती हैं।

अतः प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है कि वह अपने संकीर्ण स्वार्थों और व्यक्तिगत अस्तित्व से ऊपर उठकर राष्ट्र-हित को सर्वोपरि माने और राष्ट्र के अमर गौरव के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने को तत्पर रहे।

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