अथवा
'साम्प्रदायिक सद्भाव और सौहार्द बनाए रखने के लिए हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि प्रेम से प्रेम और विश्वास से विश्वास उत्पन्न होता है । और यह भी नहीं भूलना चाहिए कि घृणा से घृणा का जन्म होता है जो दावाग्नि की तरह सबको जलाने का काम करती है । महात्मा गाँधी घृणा को प्रेम से जीतने में विश्वास करते थे । उन्होंने सर्वधर्म समभाव द्वारा साम्प्रदायिक घृणा को मिटाने का आजीवन प्रयत्न किया । सभी धर्म आत्मा के शांति के लिए भिन्न-भिन्न उपाय और साधन बनाते हैं । धर्मों में छोटे-बड़े का कोई भेद नहीं है । सभी धर्म सत्य, प्रेम, समता, सदाचार और नैतिकता पर बल देते हैं । इसलिए धर्म के मूल में पार्थक्य भेद नहीं है ।'
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
संक्षेपण (Précis Writing):
उचित शीर्षक: सांप्रदायिक सौहार्द एवं सर्वधर्म समभाव
संक्षेपण:
सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रेम और विश्वास अनिवार्य हैं, जबकि घृणा विनाशकारी होती है। महात्मा गांधी ने सर्वधर्म समभाव और प्रेम द्वारा घृणा को समाप्त करने का आजीवन प्रयास किया। सभी धर्मों की उपासना पद्धतियाँ भले ही भिन्न हों, किन्तु उनके मूल में आत्मिक शांति, सत्य, प्रेम, सदाचार और नैतिकता का एक ही शाश्वत संदेश निहित है।
(मूल शब्द: ~105 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~44 शब्द)
हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
अथवा
'साम्प्रदायिक सद्भाव और सौहार्द बनाए रखने के लिए हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि प्रेम से प्रेम और विश्वास से विश्वास उत्पन्न होता है । और यह भी नहीं भूलना चाहिए कि घृणा से घृणा का जन्म होता है जो दावाग्नि की तरह सबको जलाने का काम करती है । महात्मा गाँधी घृणा को प्रेम से जीतने में विश्वास करते थे । उन्होंने सर्वधर्म समभाव द्वारा साम्प्रदायिक घृणा को मिटाने का आजीवन प्रयत्न किया । सभी धर्म आत्मा के शांति के लिए भिन्न-भिन्न उपाय और साधन बनाते हैं । धर्मों में छोटे-बड़े का कोई भेद नहीं है । सभी धर्म सत्य, प्रेम, समता, सदाचार और नैतिकता पर बल देते हैं । इसलिए धर्म के मूल में पार्थक्य भेद नहीं है ।'
संक्षेपण (Précis Writing):
उचित शीर्षक: सांप्रदायिक सौहार्द एवं सर्वधर्म समभाव
संक्षेपण:
सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रेम और विश्वास अनिवार्य हैं, जबकि घृणा विनाशकारी होती है। महात्मा गांधी ने सर्वधर्म समभाव और प्रेम द्वारा घृणा को समाप्त करने का आजीवन प्रयास किया। सभी धर्मों की उपासना पद्धतियाँ भले ही भिन्न हों, किन्तु उनके मूल में आत्मिक शांति, सत्य, प्रेम, सदाचार और नैतिकता का एक ही शाश्वत संदेश निहित है।
(मूल शब्द: ~105 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~44 शब्द)