"चरन धरत शङ्का करत, भावत नींद न भोर / सुबरन को ढूँढत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर" इस दोहे में सभंगपद श्लेष है या अभंगपद श्लेष?
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
उत्तर: अभंगपद श्लेष (अभंग श्लेष)
(व्याख्या: यहाँ 'सुबरन' शब्द को बिना तोड़े ही प्रसंगानुसार 3 अर्थ निकलते हैं: कवि हेतु सुंदर शब्द, व्यभिचारी हेतु सुंदर रूप-रंग, तथा चोर हेतु स्वर्ण/सोना; अतः यह अभंग श्लेष है)।
हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
"चरन धरत शङ्का करत, भावत नींद न भोर / सुबरन को ढूँढत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर" इस दोहे में सभंगपद श्लेष है या अभंगपद श्लेष?
उत्तर: अभंगपद श्लेष (अभंग श्लेष)
(व्याख्या: यहाँ 'सुबरन' शब्द को बिना तोड़े ही प्रसंगानुसार 3 अर्थ निकलते हैं: कवि हेतु सुंदर शब्द, व्यभिचारी हेतु सुंदर रूप-रंग, तथा चोर हेतु स्वर्ण/सोना; अतः यह अभंग श्लेष है)।