Home›MPPSC Mains (Eng)›General Hindi & Grammar›General Hindi & Grammar›Pallavan / Expansion of Idea (5 marks)›रेखांकित अथवा दी गई पंक्तियों का पल्लवन अथवा भाव पल्लवन कीजिए: नारी

रेखांकित अथवा दी गई पंक्तियों का पल्लवन अथवा भाव पल्लवन कीजिए: नारी का सौन्दर्य आभूषणों से नहीं, सौम्य गुणों से होता है।

202110M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

भाव पल्लवन (Expansion of Idea):

सूक्ति: "नारी का सौन्दर्य आभूषणों से नहीं, सौम्य गुणों से होता है।"

पल्लवन:
संसार में बाह्य रूप-रंग और स्वर्ण-रत्नजड़ित आभूषण क्षणभंगुर व नश्वर होते हैं, जबकि आंतरिक गुण और सद्व्यवहार शाश्वत एवं सर्वप्रिय होते हैं। नारी का वास्तविक और चिरंतन सौंदर्य उसके बाह्य श्रृंगार अथवा बहुमूल्य आभूषणों में नहीं, बल्कि उसके शील, लज्जा, ममता, करुणा, त्याग, क्षमा, विद्या और विनय जैसे सौम्य एवं उदात्त गुणों में निहित है।

सोने और हीरों के आभूषण केवल तन को सजा सकते हैं, परन्तु वे मन को सुंदर और पूज्य नहीं बना सकते। गार्गी, मैत्रेयी, अनुसूया, रानी लक्ष्मीबाई और अहिल्याबाई होल्कर जैसी विदुषी एवं वीरांगना नारियाँ अपने बाह्य आभूषणों के कारण नहीं, अपितु अपने अदम्य शौर्य, ज्ञान, विवेक और लोक-कल्याणकारी चरित्र के कारण इतिहास में वंदनीय हैं।

जिस प्रकार सुगंध के बिना कागज़ के फूल व्यर्थ होते हैं, उसी प्रकार सद्गुणों के बिना बाह्य आभूषणों से सुसज्जित नारी भी समाज में स्थायी सम्मान प्राप्त नहीं कर सकती। अतः नारी का सच्चा आभूषण उसका चरित्र, शुचिता और सौम्य आचरण ही है।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

रेखांकित अथवा दी गई पंक्तियों का पल्लवन अथवा भाव पल्लवन कीजिए: नारी का सौन्दर्य आभूषणों से नहीं, सौम्य गुणों से होता है।

भाव पल्लवन (Expansion of Idea):

सूक्ति: "नारी का सौन्दर्य आभूषणों से नहीं, सौम्य गुणों से होता है।"

पल्लवन:
संसार में बाह्य रूप-रंग और स्वर्ण-रत्नजड़ित आभूषण क्षणभंगुर व नश्वर होते हैं, जबकि आंतरिक गुण और सद्व्यवहार शाश्वत एवं सर्वप्रिय होते हैं। नारी का वास्तविक और चिरंतन सौंदर्य उसके बाह्य श्रृंगार अथवा बहुमूल्य आभूषणों में नहीं, बल्कि उसके शील, लज्जा, ममता, करुणा, त्याग, क्षमा, विद्या और विनय जैसे सौम्य एवं उदात्त गुणों में निहित है।

सोने और हीरों के आभूषण केवल तन को सजा सकते हैं, परन्तु वे मन को सुंदर और पूज्य नहीं बना सकते। गार्गी, मैत्रेयी, अनुसूया, रानी लक्ष्मीबाई और अहिल्याबाई होल्कर जैसी विदुषी एवं वीरांगना नारियाँ अपने बाह्य आभूषणों के कारण नहीं, अपितु अपने अदम्य शौर्य, ज्ञान, विवेक और लोक-कल्याणकारी चरित्र के कारण इतिहास में वंदनीय हैं।

जिस प्रकार सुगंध के बिना कागज़ के फूल व्यर्थ होते हैं, उसी प्रकार सद्गुणों के बिना बाह्य आभूषणों से सुसज्जित नारी भी समाज में स्थायी सम्मान प्राप्त नहीं कर सकती। अतः नारी का सच्चा आभूषण उसका चरित्र, शुचिता और सौम्य आचरण ही है।

See this question in context →
Free Android App

Practice Better on the StatePYQ Mobile App

⚡ Error Diary · ⏱ Timed Mains Answer Pacer · 📴 Offline Revision Vault

Get it onGoogle Play