Home›MPPSC Mains (Eng)›General Hindi & Grammar›General Hindi & Grammar›Pallavan / Expansion of Idea (5 marks)›लीकै लीक सबै चलैं, लीकै चलै कपूत। लीक छाँड़ि तीनौ चलैं — शायर, सिंह,

लीकै लीक सबै चलैं, लीकै चलै कपूत। लीक छाँड़ि तीनौ चलैं — शायर, सिंह, सपूत।।

202110M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

भाव पल्लवन (Expansion of Idea):

सूक्ति: "लीकै लीक सबै चलैं, लीकै चलै कपूत। लीक छाँड़ि तीनौ चलैं — शायर, सिंह, सपूत॥"

पल्लवन:
यह उक्ति रूढ़िवादिता और परंपरा की अंधी लकीर पीटने वालों तथा मौलिक चिंतन व अदम्य पौरुष के धनी व्यक्तित्वों के बीच का अंतर स्पष्ट करती है। सामान्य जनमानस और अयोग्य (कपूत) व्यक्ति सदैव बनी-बनाई लीक (रूढ़िवादी परंपरा) पर बिना अपना विवेक लगाए चलते रहते हैं। किन्तु संसार में जो मौलिक, तेजस्वी और युगांतरकारी होते हैं, वे पुरानी सीमाओं और लीक को तोड़कर अपना स्वतंत्र मार्ग स्वयं निर्मित करते हैं।

कवि ने ऐसे तीन विशिष्ट तत्वों का उल्लेख किया है:

  1. शायर (कवि/कलाकार): कवि अपनी मौलिक कल्पना, नवीन भाव-बोध और सृजनशीलता से परंपरा की सीमाओं को तोड़कर नई काव्य-सृष्टि रचता है।
  2. सिंह (मृगराज): सिंह जंगल में किसी के बनाए रास्ते पर नहीं चलता, वह जहाँ कदम रखता है वहीँ उसका मार्ग और साम्राज्य स्थापित होता है।
  3. सपूत (श्रेष्ठ एवं साहसी संतान): सुपुत्र पूर्वजों की प्रतिष्ठा पर निर्भर न रहकर अपनी योग्यता, पुरुषार्थ और नव-दृष्टि से समाज और राष्ट्र के लिए नए गौरवपूर्ण प्रतिमान स्थापित करता है।

अतः मानवता का विकास लीक पर चलने से नहीं, अपितु लीक छोड़कर नए आयाम स्थापित करने वाले साहसी व्यक्तित्वों से ही संभव हुआ है।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

लीकै लीक सबै चलैं, लीकै चलै कपूत। लीक छाँड़ि तीनौ चलैं — शायर, सिंह, सपूत।।

भाव पल्लवन (Expansion of Idea):

सूक्ति: "लीकै लीक सबै चलैं, लीकै चलै कपूत। लीक छाँड़ि तीनौ चलैं — शायर, सिंह, सपूत॥"

पल्लवन:
यह उक्ति रूढ़िवादिता और परंपरा की अंधी लकीर पीटने वालों तथा मौलिक चिंतन व अदम्य पौरुष के धनी व्यक्तित्वों के बीच का अंतर स्पष्ट करती है। सामान्य जनमानस और अयोग्य (कपूत) व्यक्ति सदैव बनी-बनाई लीक (रूढ़िवादी परंपरा) पर बिना अपना विवेक लगाए चलते रहते हैं। किन्तु संसार में जो मौलिक, तेजस्वी और युगांतरकारी होते हैं, वे पुरानी सीमाओं और लीक को तोड़कर अपना स्वतंत्र मार्ग स्वयं निर्मित करते हैं।

कवि ने ऐसे तीन विशिष्ट तत्वों का उल्लेख किया है:

  1. शायर (कवि/कलाकार): कवि अपनी मौलिक कल्पना, नवीन भाव-बोध और सृजनशीलता से परंपरा की सीमाओं को तोड़कर नई काव्य-सृष्टि रचता है।
  2. सिंह (मृगराज): सिंह जंगल में किसी के बनाए रास्ते पर नहीं चलता, वह जहाँ कदम रखता है वहीँ उसका मार्ग और साम्राज्य स्थापित होता है।
  3. सपूत (श्रेष्ठ एवं साहसी संतान): सुपुत्र पूर्वजों की प्रतिष्ठा पर निर्भर न रहकर अपनी योग्यता, पुरुषार्थ और नव-दृष्टि से समाज और राष्ट्र के लिए नए गौरवपूर्ण प्रतिमान स्थापित करता है।

अतः मानवता का विकास लीक पर चलने से नहीं, अपितु लीक छोड़कर नए आयाम स्थापित करने वाले साहसी व्यक्तित्वों से ही संभव हुआ है।

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