किसी एक गद्यांश का एक तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए: ऋतुराज वसंत के आगमन से ही शीत का भयंकर प्रकोप भाग जाता है। पतझड़ में पश्चिम-पवन ने जीर्ण-शीर्ण पत्रों को गिराकर लता कुंजों, पेड़-पौधों को स्वच्छ और निर्मल बना दिया। वृक्षों और लताओं के अंग में नूतन पत्तियों के प्रस्फुटन से यौवन की मादकता छा गई। कनेर, मदार, पाटल इत्यादि पुष्पों की सुगंधि दिग्दिगंत में अपनी मादकता का संचार करने लगी। न शीत की कठोरता, न ग्रीष्म का ताप, समशीतोष्ण वातावरण में प्रत्येक प्राणी की नस-नस में उत्फुल्लता और उमंग की लहरें उठ रही हैं। गेहूँ के सुनहले बालों से पवन स्पर्श के कारण रुनझुन का संगीत फूट रहा है। पत्तों के अधरों पर सोया हुआ संगीत मुखर हो गया है। पलाश वन अपनी अरुणिमा में फूला नहीं समाता है। ऋतुराज वसंत के सुशासन और सुव्यवस्था की छटा हर ओर दिखाई पड़ती है। कलियों के यौवन की अँगड़ाई भ्रमरों को आमंत्रण दे रही है। वसंत के आगमन के साथ ही जैसे जीर्णता और पुरातन का प्रभाव तिरोहित हो गया है। प्रकृति के कण-कण में नए जीवन का संचार हो गया है। आम्रमंजरियों की भीनी गंध और कोयल का पंचम आलाप, भ्रमरों का गुंजन और कलियों का चटक वनों और उद्यानों के अंगों में शोभा का संचार, सब ऐसा लगता है जैसे जीवन में सुख ही सत्य है, आनन्द के एक क्षण का मूल्य पूरे जीवन को अर्पित करके भी नहीं चुकाया जा सकता है। प्रकृति ने वसंत के आगमन पर अपने रूप को इतना सँवारा है, अंग-अंग को सजाया और रचा है कि उसकी शोभा का वर्णन असंभव है। उसकी उपमा नहीं दी जा सकती।
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
संक्षेपण (Précis Writing):
उचित शीर्षक: ऋतुराज वसंत का सौंदर्य एवं प्रकृति में नवजीवन
संक्षेपण:
वसंत के आगमन से शीत का प्रकोप समाप्त होकर समशीतोष्ण वातावरण में प्रकृति और समस्त प्राणियों में नवजीवन व उल्लास का संचार होता है। वृक्षों पर नई कोपलों, कनेर-मदार आदि की मादक सुगंध, पके गेहूँ की बालियों और पलाश के लाल फूलों से प्रकृति का रूप निखर उठता है। आम्रमंजरियों की महक, कोयल की कूक और भौरों के गुंजन से संपूर्ण प्रकृति का कण-कण अनुपम सौंदर्य और अनिर्वचनीय आनंद से परिपूर्ण हो जाता है।
(मूल शब्द: ~155 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~58 शब्द)
हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
किसी एक गद्यांश का एक तिहाई शब्दों में संक्षेपण कीजिए: ऋतुराज वसंत के आगमन से ही शीत का भयंकर प्रकोप भाग जाता है। पतझड़ में पश्चिम-पवन ने जीर्ण-शीर्ण पत्रों को गिराकर लता कुंजों, पेड़-पौधों को स्वच्छ और निर्मल बना दिया। वृक्षों और लताओं के अंग में नूतन पत्तियों के प्रस्फुटन से यौवन की मादकता छा गई। कनेर, मदार, पाटल इत्यादि पुष्पों की सुगंधि दिग्दिगंत में अपनी मादकता का संचार करने लगी। न शीत की कठोरता, न ग्रीष्म का ताप, समशीतोष्ण वातावरण में प्रत्येक प्राणी की नस-नस में उत्फुल्लता और उमंग की लहरें उठ रही हैं। गेहूँ के सुनहले बालों से पवन स्पर्श के कारण रुनझुन का संगीत फूट रहा है। पत्तों के अधरों पर सोया हुआ संगीत मुखर हो गया है। पलाश वन अपनी अरुणिमा में फूला नहीं समाता है। ऋतुराज वसंत के सुशासन और सुव्यवस्था की छटा हर ओर दिखाई पड़ती है। कलियों के यौवन की अँगड़ाई भ्रमरों को आमंत्रण दे रही है। वसंत के आगमन के साथ ही जैसे जीर्णता और पुरातन का प्रभाव तिरोहित हो गया है। प्रकृति के कण-कण में नए जीवन का संचार हो गया है। आम्रमंजरियों की भीनी गंध और कोयल का पंचम आलाप, भ्रमरों का गुंजन और कलियों का चटक वनों और उद्यानों के अंगों में शोभा का संचार, सब ऐसा लगता है जैसे जीवन में सुख ही सत्य है, आनन्द के एक क्षण का मूल्य पूरे जीवन को अर्पित करके भी नहीं चुकाया जा सकता है। प्रकृति ने वसंत के आगमन पर अपने रूप को इतना सँवारा है, अंग-अंग को सजाया और रचा है कि उसकी शोभा का वर्णन असंभव है। उसकी उपमा नहीं दी जा सकती।
संक्षेपण (Précis Writing):
उचित शीर्षक: ऋतुराज वसंत का सौंदर्य एवं प्रकृति में नवजीवन
संक्षेपण:
वसंत के आगमन से शीत का प्रकोप समाप्त होकर समशीतोष्ण वातावरण में प्रकृति और समस्त प्राणियों में नवजीवन व उल्लास का संचार होता है। वृक्षों पर नई कोपलों, कनेर-मदार आदि की मादक सुगंध, पके गेहूँ की बालियों और पलाश के लाल फूलों से प्रकृति का रूप निखर उठता है। आम्रमंजरियों की महक, कोयल की कूक और भौरों के गुंजन से संपूर्ण प्रकृति का कण-कण अनुपम सौंदर्य और अनिर्वचनीय आनंद से परिपूर्ण हो जाता है।
(मूल शब्द: ~155 शब्द | संक्षेपण शब्द: ~58 शब्द)