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निम्नलिखित विषय पर लगभग 1000 शब्दों में निबंध लिखिए : "खेल और स्वास्थ्य"

202250M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

खेल और स्वास्थ्य: शारीरिक आरोग्यता, मानसिक दृढ़ता, जीवन-शैली विकारों से मुक्ति एवं स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण

"शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्" (मानव जीवन के समस्त कर्तव्यों, धर्म एवं पुरुषार्थों की सिद्धि का प्रथम और प्रमुख माध्यम यह शरीर ही है)। — महाकवि कालिदास
"आप गीता का अध्ययन करने की तुलना में फुटबॉल के मैदान में खेलकर ईश्वर के अधिक निकट पहुँच सकेंगे।" — स्वामी विवेकानंद

1. प्रस्तावना एवं स्वास्थ्य की समग्र अवधारणा:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वास्थ्य केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि पूर्ण शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आत्मिक आरोग्यता की अवस्था है। इस समग्र आरोग्यता को प्राप्त करने का सबसे स्वाभाविक, आनंददायक और प्रभावी माध्यम 'खेल और शारीरिक व्यायाम' हैं। आधुनिक युग के गतिहीन जीवन (Sedentary Lifestyle), कंक्रीट के जंगलों, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और अनियंत्रित मानसिक तनाव के दौर में खेलकूद केवल मनोरंजन का साधन न रहकर, मानव अस्तित्व और राष्ट्रीय कार्यक्षमता की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।

2. शारीरिक स्वास्थ्य एवं जैविक क्रियाओं पर खेल का प्रभाव:

  • असंक्रामक जीवन-शैली रोगों (NCDs) से सुरक्षा: नियमित खेलकूद उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा और टाइप-2 मधुमेह को नियंत्रित करता है। भारत को 'मधुमेह की राजधानी' बनने से रोकने में खेल सर्वोत्तम प्राकृतिक औषधि है।
  • हड्डी एवं मांसपेशियों की मजबूती: फेफड़ों की कार्यक्षमता (Oxygen Intake) में वृद्धि, जोड़ों का लचीलापन तथा ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की कमजोरी) से बचाव।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) में वृद्धि: शारीरिक परिश्रम से रक्त परिसंचरण सुधरता है और शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली सुदृढ़ होती है।

3. मानसिक आरोग्यता एवं व्यक्तित्व निर्माण:

  • तनाव एवं अवसाद से मुक्ति: खेल के दौरान मस्तिष्क से 'एंडोर्फिन', 'डोपामाइन' और 'सेरोटोनिन' जैसे प्रसन्नतादायक हार्मोन्स का स्राव होता है, जो मानसिक थकान, चिंता और अवसाद को जड़ से मिटाते हैं।
  • संवेगात्मक संतुलन एवं पराजय स्वीकारने का साहस: खेल मनुष्य को जीत में विनम्र रहना और हार से सीखकर पुनः दोगुने उत्साह से उठने की मानसिक मजबूती (Resilience) सिखाता है।
  • सामूहिक नेतृत्व व अनुशासन: टीम भावना (Team Spirit), त्वरित निर्णय क्षमता, परस्पर सहयोग, समय की पाबंदी तथा नैतिक खेल भावना (Sportsmanship) का विकास।

4. राष्ट्रीय खेल नीतियाँ एवं प्रमुख अभियान:

  • फिट इंडिया अभियान (Fit India Movement): राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त) पर प्रारंभ किया गया जन-आंदोलन, जिसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को दैनिक जीवन में शारीरिक गतिविधि अपनाने हेतु प्रेरित करना है।
  • खेलो इंडिया योजना (Khelo India): जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं की खोज, विश्वस्तरीय खेल मैदानों का निर्माण तथा युवा खिलाड़ियों को दीर्घकालिक छात्रवृत्ति।
  • टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS): ओलंपिक व एशियाई खेलों के संभावित पदक विजेताओं को विश्वस्तरीय विदेशी प्रशिक्षण व खेल विज्ञान सहायता।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020): खेल को पाठ्येतर गतिविधि (Extra-Curricular) के स्थान पर मुख्य पाठ्यक्रम का अनिवार्य व क्रेडिट-युक्त विषय बनाना।

5. मध्य प्रदेश: खेल क्रांति का उभरता हुआ राष्ट्रीय मॉडल:
मध्य प्रदेश ने खेलों के विकास में देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है:

  • विश्वस्तरीय 18 राज्य खेल अकादमियाँ: शूटिंग अकादमी (भोपाल), वाटर स्पोर्ट्स अकादमी (बड़ा तालाब भोपाल), घुड़सवारी अकादमी, तथा पुरुष/महिला हॉकी अकादमियाँ (ग्वालियर/भोपाल) स्थापित, जिन्होंने ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर व विवेक सागर प्रसाद जैसे ओलंपिक पदक विजेता दिए।
  • मलखंब: राज्य खेल का गौरव: मध्य प्रदेश ने पारंपरिक योगिक खेल मलखंब को 'राज्य खेल' घोषित कर 'प्रभात जोशी पुरस्कार' प्रारंभ किया।
  • राज्य खेल पुरस्कार एवं प्रोत्साहन: विक्रम पुरस्कार (सीनियर), एकलव्य पुरस्कार (जूनियर) तथा विश्वामित्र पुरस्कार (प्रशिक्षक) के साथ पदक विजेताओं को शासकीय सेवाओं में सीधी नियुक्ति।
  • खेलो एमपी यूथ गेम्स: ब्लॉक से राज्य स्तर तक ग्रामीण खेल प्रतिभाओं की खोज।

6. रणनीतिक सुधार एवं आगे की राह:

  • दैनिक अनिवार्य खेल कालखंड: प्रत्येक प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय में प्रतिदिन न्यूनतम 45 मिनट का खेल अनिवार्य करना।
  • ग्राम पंचायतों में खेल मैदान: मनरेगा व अमृत सरोवर के समन्वय से प्रत्येक गाँव में ओपन जिम और खेल मैदानों का विकास।
  • पारंपरिक खेलों का पुनरुद्धार: कबड्डी, खो-खो, कुश्ती और तीरंदाजी जैसे कम खर्चीले देशी खेलों को प्रोत्साहन।
  • खेल विज्ञान व पोषण का विस्तार: जिला स्तर पर स्पोर्ट्स इंजरी फिजियोथेरेपी व पोषण विशेषज्ञों की उपलब्धता।

7. निष्कर्ष:
स्वस्थ नागरिक ही एक समर्थ, समृद्ध और विजयी राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। जब खेल हमारे दैनिक जीवन का संस्कार बन जाएगा, तभी देश जीवन-शैली के रोगों से मुक्त होकर ऊर्जावान बनेगा। खेल के मैदानों से उपजी ऊर्जा और अनुशासन ही भारत को ओलंपिक पोडियम पर शीर्ष स्थान दिलाएगा और 'विकसित भारत @2047' की स्वर्णिम आधारशिला रखेगा।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

निम्नलिखित विषय पर लगभग 1000 शब्दों में निबंध लिखिए : "खेल और स्वास्थ्य"

खेल और स्वास्थ्य: शारीरिक आरोग्यता, मानसिक दृढ़ता, जीवन-शैली विकारों से मुक्ति एवं स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण

"शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्" (मानव जीवन के समस्त कर्तव्यों, धर्म एवं पुरुषार्थों की सिद्धि का प्रथम और प्रमुख माध्यम यह शरीर ही है)। — महाकवि कालिदास
"आप गीता का अध्ययन करने की तुलना में फुटबॉल के मैदान में खेलकर ईश्वर के अधिक निकट पहुँच सकेंगे।" — स्वामी विवेकानंद

1. प्रस्तावना एवं स्वास्थ्य की समग्र अवधारणा:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वास्थ्य केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि पूर्ण शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आत्मिक आरोग्यता की अवस्था है। इस समग्र आरोग्यता को प्राप्त करने का सबसे स्वाभाविक, आनंददायक और प्रभावी माध्यम 'खेल और शारीरिक व्यायाम' हैं। आधुनिक युग के गतिहीन जीवन (Sedentary Lifestyle), कंक्रीट के जंगलों, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और अनियंत्रित मानसिक तनाव के दौर में खेलकूद केवल मनोरंजन का साधन न रहकर, मानव अस्तित्व और राष्ट्रीय कार्यक्षमता की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।

2. शारीरिक स्वास्थ्य एवं जैविक क्रियाओं पर खेल का प्रभाव:

  • असंक्रामक जीवन-शैली रोगों (NCDs) से सुरक्षा: नियमित खेलकूद उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा और टाइप-2 मधुमेह को नियंत्रित करता है। भारत को 'मधुमेह की राजधानी' बनने से रोकने में खेल सर्वोत्तम प्राकृतिक औषधि है।
  • हड्डी एवं मांसपेशियों की मजबूती: फेफड़ों की कार्यक्षमता (Oxygen Intake) में वृद्धि, जोड़ों का लचीलापन तथा ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की कमजोरी) से बचाव।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) में वृद्धि: शारीरिक परिश्रम से रक्त परिसंचरण सुधरता है और शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली सुदृढ़ होती है।

3. मानसिक आरोग्यता एवं व्यक्तित्व निर्माण:

  • तनाव एवं अवसाद से मुक्ति: खेल के दौरान मस्तिष्क से 'एंडोर्फिन', 'डोपामाइन' और 'सेरोटोनिन' जैसे प्रसन्नतादायक हार्मोन्स का स्राव होता है, जो मानसिक थकान, चिंता और अवसाद को जड़ से मिटाते हैं।
  • संवेगात्मक संतुलन एवं पराजय स्वीकारने का साहस: खेल मनुष्य को जीत में विनम्र रहना और हार से सीखकर पुनः दोगुने उत्साह से उठने की मानसिक मजबूती (Resilience) सिखाता है।
  • सामूहिक नेतृत्व व अनुशासन: टीम भावना (Team Spirit), त्वरित निर्णय क्षमता, परस्पर सहयोग, समय की पाबंदी तथा नैतिक खेल भावना (Sportsmanship) का विकास।

4. राष्ट्रीय खेल नीतियाँ एवं प्रमुख अभियान:

  • फिट इंडिया अभियान (Fit India Movement): राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त) पर प्रारंभ किया गया जन-आंदोलन, जिसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को दैनिक जीवन में शारीरिक गतिविधि अपनाने हेतु प्रेरित करना है।
  • खेलो इंडिया योजना (Khelo India): जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं की खोज, विश्वस्तरीय खेल मैदानों का निर्माण तथा युवा खिलाड़ियों को दीर्घकालिक छात्रवृत्ति।
  • टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS): ओलंपिक व एशियाई खेलों के संभावित पदक विजेताओं को विश्वस्तरीय विदेशी प्रशिक्षण व खेल विज्ञान सहायता।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020): खेल को पाठ्येतर गतिविधि (Extra-Curricular) के स्थान पर मुख्य पाठ्यक्रम का अनिवार्य व क्रेडिट-युक्त विषय बनाना।

5. मध्य प्रदेश: खेल क्रांति का उभरता हुआ राष्ट्रीय मॉडल:
मध्य प्रदेश ने खेलों के विकास में देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है:

  • विश्वस्तरीय 18 राज्य खेल अकादमियाँ: शूटिंग अकादमी (भोपाल), वाटर स्पोर्ट्स अकादमी (बड़ा तालाब भोपाल), घुड़सवारी अकादमी, तथा पुरुष/महिला हॉकी अकादमियाँ (ग्वालियर/भोपाल) स्थापित, जिन्होंने ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर व विवेक सागर प्रसाद जैसे ओलंपिक पदक विजेता दिए।
  • मलखंब: राज्य खेल का गौरव: मध्य प्रदेश ने पारंपरिक योगिक खेल मलखंब को 'राज्य खेल' घोषित कर 'प्रभात जोशी पुरस्कार' प्रारंभ किया।
  • राज्य खेल पुरस्कार एवं प्रोत्साहन: विक्रम पुरस्कार (सीनियर), एकलव्य पुरस्कार (जूनियर) तथा विश्वामित्र पुरस्कार (प्रशिक्षक) के साथ पदक विजेताओं को शासकीय सेवाओं में सीधी नियुक्ति।
  • खेलो एमपी यूथ गेम्स: ब्लॉक से राज्य स्तर तक ग्रामीण खेल प्रतिभाओं की खोज।

6. रणनीतिक सुधार एवं आगे की राह:

  • दैनिक अनिवार्य खेल कालखंड: प्रत्येक प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय में प्रतिदिन न्यूनतम 45 मिनट का खेल अनिवार्य करना।
  • ग्राम पंचायतों में खेल मैदान: मनरेगा व अमृत सरोवर के समन्वय से प्रत्येक गाँव में ओपन जिम और खेल मैदानों का विकास।
  • पारंपरिक खेलों का पुनरुद्धार: कबड्डी, खो-खो, कुश्ती और तीरंदाजी जैसे कम खर्चीले देशी खेलों को प्रोत्साहन।
  • खेल विज्ञान व पोषण का विस्तार: जिला स्तर पर स्पोर्ट्स इंजरी फिजियोथेरेपी व पोषण विशेषज्ञों की उपलब्धता।

7. निष्कर्ष:
स्वस्थ नागरिक ही एक समर्थ, समृद्ध और विजयी राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। जब खेल हमारे दैनिक जीवन का संस्कार बन जाएगा, तभी देश जीवन-शैली के रोगों से मुक्त होकर ऊर्जावान बनेगा। खेल के मैदानों से उपजी ऊर्जा और अनुशासन ही भारत को ओलंपिक पोडियम पर शीर्ष स्थान दिलाएगा और 'विकसित भारत @2047' की स्वर्णिम आधारशिला रखेगा।

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