Home›MPPSC Mains (Eng)›Hindi Essay & Draft Writing›Hindi Essay & Draft Writing›Second Essay (20 marks)›निम्नलिखित विषय पर लगभग 500 शब्दों में निबंध लिखिए : "संघर्ष और जीवन"

निम्नलिखित विषय पर लगभग 500 शब्दों में निबंध लिखिए : "संघर्ष और जीवन"

202225M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

संघर्ष और जीवन: व्यक्तित्व का निखार, संकल्प की विजय एवं मानवीय सार्थकता का शाश्वत मार्ग

"वसुधा का नेता कौन हुआ? भूखण्ड-विजेता कौन हुआ?
अतुलित यश क्रेता कौन हुआ? नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ?
जिसने न कभी आराम किया, विघ्नों में रहकर नाम किया॥"
— राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' (रश्मिरथी)

1. प्रस्तावना एवं संघर्ष का शाश्वत नियम:
जीवन और संघर्ष एक-दूसरे के पर्याय हैं। संघर्ष जीवन की कोई आकस्मिक विसंगति नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव चेतना का सर्वव्यापी सत्य है। एक नन्हे बीज को भी अंकुरित होकर विशाल वटवृक्ष बनने हेतु धरती का सीना चीरना पड़ता है; एक तितली को भी उड़ने से पहले अपने कोकून के अंधकार से जूझना पड़ता है। संघर्षहीन जीवन ठहराव, शिथिलता और पतन की ओर ले जाता है, जबकि चुनौतियों से जूझता हुआ जीवन शक्ति, तेज और अद्वितीय गौरव से आलोकित होता है।

2. व्यक्तित्व निर्माण की कसौटी (संघर्ष का दार्शनिक महत्त्व):

  • प्रतिभा का परिष्कार: स्वर्ण की चमक तभी निखरती है जब वह धधकती अग्नि की भट्टी में तपता है; कोयला भीषण भूगर्भीय दबाव सहकर ही बहुमूल्य 'हीरा' बनता है। इसी प्रकार मनुष्य का चरित्र और मेधा संघर्षों की कसौटी पर कसकर ही कुंदन बनते हैं।
  • सुषुप्त शक्तियों का जागरण: सुख और सुविधा मनुष्य को आलसी व संवेदनहीन बनाते हैं, जबकि कठिनाइयाँ और अभाव मनुष्य के भीतर छिपे अदम्य साहस, नवाचार और बौद्धिक क्षमताओं को जाग्रत करते हैं।
  • संवेदना एवं विनम्रता का विकास: जो व्यक्ति स्वयं संघर्ष के कांटों पर चला हो, वही दूसरों की पीड़ा, गरीबी और असहायता को गहराई से समझ सकता है।

3. संघर्ष से शिखर तक: ऐतिहासिक प्रेरणा-पुंज:

  • बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर: घोर सामाजिक अपमान, अस्पृश्यता और दरिद्रता के विरुद्ध निरंतर अध्ययन और वैचारिक संघर्ष कर भारत के संविधान निर्माता और समता के अग्रदूत बने।
  • भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम: रामेश्वरम के तट पर अखबार बेचने से लेकर वैज्ञानिक शोधों के निरंतर संघर्षों को पार कर भारत के 'मिसाइल मैन' और 'जनता के राष्ट्रपति' बने।
  • मध्य प्रदेश की वीरांगनाएँ (रानी दुर्गावती एवं देवी अहिल्याबाई): पारिवारिक आघातों और विषम युद्धों का डटकर सामना करते हुए सुशासन, धर्म और राष्ट्र-रक्षा का अमर कीर्तिमान स्थापित किया।

4. आधुनिक परिवेश में युवाओं हेतु संघर्ष का मंत्र:

  • विफलता को सीख मानना: असफलता जीवन का पूर्ण विराम नहीं, बल्कि नए प्रयासों का शुभारंभ है।
  • गीता का समत्व भाव: भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशानुसार—"सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ"—सफलता में अति-उत्साह और विफलता में अवसाद से बचकर निरंतर कर्मरत रहना।
  • अथक प्रयास की शक्ति: हरिवंश राय बच्चन के अमर शब्दों को आत्मसात करना—"लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।"

5. निष्कर्ष:
जीवन फूलों की सेज नहीं, बल्कि कांटों भरा एक ऐसा मार्ग है जिस पर चलकर ही सफलता का सिंदूरी सवेरा प्राप्त होता है। जो संघर्ष से डरकर पलायन करते हैं, वे इतिहास के पन्नों में खो जाते हैं; किन्तु जो कठिनाइयों की आंखों में आंखें डालकर लड़ते हैं, वे स्वयं इतिहास रचते हैं। संघर्ष का सहर्ष वरण करना ही जीवन का सच्चा सौंदर्य और मनुष्यता की सर्वोच्च विजय है।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

निम्नलिखित विषय पर लगभग 500 शब्दों में निबंध लिखिए : "संघर्ष और जीवन"

संघर्ष और जीवन: व्यक्तित्व का निखार, संकल्प की विजय एवं मानवीय सार्थकता का शाश्वत मार्ग

"वसुधा का नेता कौन हुआ? भूखण्ड-विजेता कौन हुआ?
अतुलित यश क्रेता कौन हुआ? नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ?
जिसने न कभी आराम किया, विघ्नों में रहकर नाम किया॥"
— राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' (रश्मिरथी)

1. प्रस्तावना एवं संघर्ष का शाश्वत नियम:
जीवन और संघर्ष एक-दूसरे के पर्याय हैं। संघर्ष जीवन की कोई आकस्मिक विसंगति नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव चेतना का सर्वव्यापी सत्य है। एक नन्हे बीज को भी अंकुरित होकर विशाल वटवृक्ष बनने हेतु धरती का सीना चीरना पड़ता है; एक तितली को भी उड़ने से पहले अपने कोकून के अंधकार से जूझना पड़ता है। संघर्षहीन जीवन ठहराव, शिथिलता और पतन की ओर ले जाता है, जबकि चुनौतियों से जूझता हुआ जीवन शक्ति, तेज और अद्वितीय गौरव से आलोकित होता है।

2. व्यक्तित्व निर्माण की कसौटी (संघर्ष का दार्शनिक महत्त्व):

  • प्रतिभा का परिष्कार: स्वर्ण की चमक तभी निखरती है जब वह धधकती अग्नि की भट्टी में तपता है; कोयला भीषण भूगर्भीय दबाव सहकर ही बहुमूल्य 'हीरा' बनता है। इसी प्रकार मनुष्य का चरित्र और मेधा संघर्षों की कसौटी पर कसकर ही कुंदन बनते हैं।
  • सुषुप्त शक्तियों का जागरण: सुख और सुविधा मनुष्य को आलसी व संवेदनहीन बनाते हैं, जबकि कठिनाइयाँ और अभाव मनुष्य के भीतर छिपे अदम्य साहस, नवाचार और बौद्धिक क्षमताओं को जाग्रत करते हैं।
  • संवेदना एवं विनम्रता का विकास: जो व्यक्ति स्वयं संघर्ष के कांटों पर चला हो, वही दूसरों की पीड़ा, गरीबी और असहायता को गहराई से समझ सकता है।

3. संघर्ष से शिखर तक: ऐतिहासिक प्रेरणा-पुंज:

  • बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर: घोर सामाजिक अपमान, अस्पृश्यता और दरिद्रता के विरुद्ध निरंतर अध्ययन और वैचारिक संघर्ष कर भारत के संविधान निर्माता और समता के अग्रदूत बने।
  • भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम: रामेश्वरम के तट पर अखबार बेचने से लेकर वैज्ञानिक शोधों के निरंतर संघर्षों को पार कर भारत के 'मिसाइल मैन' और 'जनता के राष्ट्रपति' बने।
  • मध्य प्रदेश की वीरांगनाएँ (रानी दुर्गावती एवं देवी अहिल्याबाई): पारिवारिक आघातों और विषम युद्धों का डटकर सामना करते हुए सुशासन, धर्म और राष्ट्र-रक्षा का अमर कीर्तिमान स्थापित किया।

4. आधुनिक परिवेश में युवाओं हेतु संघर्ष का मंत्र:

  • विफलता को सीख मानना: असफलता जीवन का पूर्ण विराम नहीं, बल्कि नए प्रयासों का शुभारंभ है।
  • गीता का समत्व भाव: भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशानुसार—"सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ"—सफलता में अति-उत्साह और विफलता में अवसाद से बचकर निरंतर कर्मरत रहना।
  • अथक प्रयास की शक्ति: हरिवंश राय बच्चन के अमर शब्दों को आत्मसात करना—"लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।"

5. निष्कर्ष:
जीवन फूलों की सेज नहीं, बल्कि कांटों भरा एक ऐसा मार्ग है जिस पर चलकर ही सफलता का सिंदूरी सवेरा प्राप्त होता है। जो संघर्ष से डरकर पलायन करते हैं, वे इतिहास के पन्नों में खो जाते हैं; किन्तु जो कठिनाइयों की आंखों में आंखें डालकर लड़ते हैं, वे स्वयं इतिहास रचते हैं। संघर्ष का सहर्ष वरण करना ही जीवन का सच्चा सौंदर्य और मनुष्यता की सर्वोच्च विजय है।

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