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निम्नलिखित विषय पर लगभग 500 शब्दों में निबंध लिखिए : "साहस बिन जीना क्या जीना"

202225M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

साहस बिन जीना क्या जीना: आत्म-सम्मान की संजीवनी, निर्भयता एवं नैतिक शौर्य का उद्घोष

"सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है।
सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते।
विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटों में राह बनाते हैं॥"
— राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' (रश्मिरथी)

1. प्रस्तावना एवं साहस की सर्वोच्च महत्ता:
साहस मानव जीवन का वह सर्वोच्च आभूषण है जो अन्य सभी सद्गुणों को प्राणवान बनाता है। शेक्सपियर ने यथार्थ ही कहा था कि—"कायर मृत्यु से पूर्व हजारों बार मरते हैं, किन्तु साहसी जीवन में केवल एक बार ही मृत्यु का स्वाद चखते हैं।" भय, संकोच, समझौते और कायरता के साये में घुट-घुट कर सांस लेना जीवन नहीं, बल्कि एक जीवित लाश की भांति अस्तित्व रक्षा का संघर्ष मात्र है। सच्चा जीवन वही है जो स्वाभिमान, निर्भयता और चुनौतियों की छाती पर पैर रखकर अपने सिद्धांतों के लिए अडिग खड़ा रहे।

2. साहस के बहुआयामी रूप:

  • शारीरिक एवं रणकौशल साहस: सीमाओं पर माइनस 40 डिग्री के सियाचिन ग्लेशियर में देश की संप्रभुता की रक्षा करते हमारे वीर सैनिकों का अदम्य शौर्य।
  • नैतिक साहस (सर्वोच्च मानवीय गुण): असत्य, भ्रष्टाचार और अन्याय के विरुद्ध अकेले खड़े होने का साहस। सुकरात ने सत्य के लिए जहर का प्याला पी लिया, राजा राममोहन राय ने रूढ़ियों के विरुद्ध सती प्रथा का विरोध किया—यह नैतिक साहस का ही प्रकाश था।
  • बौद्धिक एवं नवाचारी साहस: स्थापित मान्यताओं को चुनौती देकर नए वैज्ञानिक सत्य और तकनीकी क्रांतियाँ (गैलीलियो, न्यूटन तथा आज के स्टार्टअप उद्यमी) रचने का साहस।
  • मानसिक एवं आंतरिक साहस: जीवन की भीषण त्रासदियों, गंभीर बीमारियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलताओं को मुस्कुराकर स्वीकारना और पुनः नए उत्साह से उठ खड़े होने का आत्मबल।

3. अमर ऐतिहासिक एवं मध्य प्रदेश के प्रेरणा-पुंज:

  • शहीद भगत सिंह एवं चंद्रशेखर आज़ाद (भाभरा, अलीराजपुर, म.प्र.): औपनिवेशिक गुलामी के आगे झुकने के बजाय स्वाभिमान से हंसते-हंसते मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने का अमर शौर्य।
  • वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई एवं रानी अवंतीबाई लोधी (रामगढ़, म.प्र.): "मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी" का सिंहनाद करते हुए अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाली नारी शक्ति की अमर गाथा।
  • अवनी चतुर्वेदी (रीवा, म.प्र.): सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर देश की प्रथम महिला लड़ाकू विमान (Fighter Pilot) चालक बनने का ऐतिहासिक साहस।

4. लोक प्रशासन एवं समकालीन जीवन में साहस की आवश्यकता:

  • प्रशासनिक सत्यनिष्ठा: एक लोक सेवक के लिए राजनीतिक दबावों और प्रलोभनों के सम्मुख संविधान और जनहित के पक्ष में निर्भीक निर्णय लेने हेतु नैतिक साहस अनिवार्य है।
  • युवाओं हेतु स्वामी विवेकानंद का संदेश: "अभय बनो (Be Fearless)!"—विफलताओं के भय से मुक्त होकर राष्ट्र निर्माण और नवप्रवर्तन में अपनी पूरी ऊर्जा लगाना।

5. निष्कर्ष:
जीवन की सार्थकता इस बात में नहीं है कि हमने कितने वर्ष जिए, बल्कि इस बात में है कि हम उन वर्षों में कितने साहस, स्वाभिमान और गरिमा के साथ जिए। साहस के बिना जीवन एक रंगहीन और निरर्थक यात्रा बनकर रह जाता है। निर्भयता और नैतिक दृढ़ता के साथ जीना ही मनुष्यता का सर्वोच्च गौरव है और यही 'सशक्त, समर्थ एवं विकसित भारत @2047' की निर्माणकारी शक्ति है।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

निम्नलिखित विषय पर लगभग 500 शब्दों में निबंध लिखिए : "साहस बिन जीना क्या जीना"

साहस बिन जीना क्या जीना: आत्म-सम्मान की संजीवनी, निर्भयता एवं नैतिक शौर्य का उद्घोष

"सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है।
सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते।
विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटों में राह बनाते हैं॥"
— राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' (रश्मिरथी)

1. प्रस्तावना एवं साहस की सर्वोच्च महत्ता:
साहस मानव जीवन का वह सर्वोच्च आभूषण है जो अन्य सभी सद्गुणों को प्राणवान बनाता है। शेक्सपियर ने यथार्थ ही कहा था कि—"कायर मृत्यु से पूर्व हजारों बार मरते हैं, किन्तु साहसी जीवन में केवल एक बार ही मृत्यु का स्वाद चखते हैं।" भय, संकोच, समझौते और कायरता के साये में घुट-घुट कर सांस लेना जीवन नहीं, बल्कि एक जीवित लाश की भांति अस्तित्व रक्षा का संघर्ष मात्र है। सच्चा जीवन वही है जो स्वाभिमान, निर्भयता और चुनौतियों की छाती पर पैर रखकर अपने सिद्धांतों के लिए अडिग खड़ा रहे।

2. साहस के बहुआयामी रूप:

  • शारीरिक एवं रणकौशल साहस: सीमाओं पर माइनस 40 डिग्री के सियाचिन ग्लेशियर में देश की संप्रभुता की रक्षा करते हमारे वीर सैनिकों का अदम्य शौर्य।
  • नैतिक साहस (सर्वोच्च मानवीय गुण): असत्य, भ्रष्टाचार और अन्याय के विरुद्ध अकेले खड़े होने का साहस। सुकरात ने सत्य के लिए जहर का प्याला पी लिया, राजा राममोहन राय ने रूढ़ियों के विरुद्ध सती प्रथा का विरोध किया—यह नैतिक साहस का ही प्रकाश था।
  • बौद्धिक एवं नवाचारी साहस: स्थापित मान्यताओं को चुनौती देकर नए वैज्ञानिक सत्य और तकनीकी क्रांतियाँ (गैलीलियो, न्यूटन तथा आज के स्टार्टअप उद्यमी) रचने का साहस।
  • मानसिक एवं आंतरिक साहस: जीवन की भीषण त्रासदियों, गंभीर बीमारियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलताओं को मुस्कुराकर स्वीकारना और पुनः नए उत्साह से उठ खड़े होने का आत्मबल।

3. अमर ऐतिहासिक एवं मध्य प्रदेश के प्रेरणा-पुंज:

  • शहीद भगत सिंह एवं चंद्रशेखर आज़ाद (भाभरा, अलीराजपुर, म.प्र.): औपनिवेशिक गुलामी के आगे झुकने के बजाय स्वाभिमान से हंसते-हंसते मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने का अमर शौर्य।
  • वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई एवं रानी अवंतीबाई लोधी (रामगढ़, म.प्र.): "मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी" का सिंहनाद करते हुए अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाली नारी शक्ति की अमर गाथा।
  • अवनी चतुर्वेदी (रीवा, म.प्र.): सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर देश की प्रथम महिला लड़ाकू विमान (Fighter Pilot) चालक बनने का ऐतिहासिक साहस।

4. लोक प्रशासन एवं समकालीन जीवन में साहस की आवश्यकता:

  • प्रशासनिक सत्यनिष्ठा: एक लोक सेवक के लिए राजनीतिक दबावों और प्रलोभनों के सम्मुख संविधान और जनहित के पक्ष में निर्भीक निर्णय लेने हेतु नैतिक साहस अनिवार्य है।
  • युवाओं हेतु स्वामी विवेकानंद का संदेश: "अभय बनो (Be Fearless)!"—विफलताओं के भय से मुक्त होकर राष्ट्र निर्माण और नवप्रवर्तन में अपनी पूरी ऊर्जा लगाना।

5. निष्कर्ष:
जीवन की सार्थकता इस बात में नहीं है कि हमने कितने वर्ष जिए, बल्कि इस बात में है कि हम उन वर्षों में कितने साहस, स्वाभिमान और गरिमा के साथ जिए। साहस के बिना जीवन एक रंगहीन और निरर्थक यात्रा बनकर रह जाता है। निर्भयता और नैतिक दृढ़ता के साथ जीना ही मनुष्यता का सर्वोच्च गौरव है और यही 'सशक्त, समर्थ एवं विकसित भारत @2047' की निर्माणकारी शक्ति है।

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