'यण्' संधि को एक उदाहरण सहित समझाइए।
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
यण् स्वर संधि की परिभाषा एवं सोदाहरण व्याख्या:
1. परिभाषा: जब ह्रस्व या दीर्घ 'इ/ई, उ/ऊ, ऋ' के बाद कोई भिन्न (विजातीय) स्वर आता है, तो इ/ई का 'य्', उ/ऊ का 'व्' तथा ऋ का 'र्' हो जाता है। इसे यण् स्वर संधि कहते हैं (इको यणचि)।
2. उदाहरण:
- इ + अ = य्: यदि + अपि = यद्यपि
- इ + आ = या: इति + आदि = इत्यादि
- उ + अ = व्: अनु + अय = अन्वय / सु + आगत = स्वागत
- ऋ + आ = रा: पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
'यण्' संधि को एक उदाहरण सहित समझाइए।
यण् स्वर संधि की परिभाषा एवं सोदाहरण व्याख्या:
1. परिभाषा: जब ह्रस्व या दीर्घ 'इ/ई, उ/ऊ, ऋ' के बाद कोई भिन्न (विजातीय) स्वर आता है, तो इ/ई का 'य्', उ/ऊ का 'व्' तथा ऋ का 'र्' हो जाता है। इसे यण् स्वर संधि कहते हैं (इको यणचि)।
2. उदाहरण:
- इ + अ = य्: यदि + अपि = यद्यपि
- इ + आ = या: इति + आदि = इत्यादि
- उ + अ = व्: अनु + अय = अन्वय / सु + आगत = स्वागत
- ऋ + आ = रा: पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा