रूपक अलंकार की विशेषता बताइए।
Model Answer
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
रूपक अलंकार की विशेषता:
- विशेषता: जहाँ अत्यधिक सादृश्यता (समानता) के कारण उपमेय और उपमान में कोई भेद न रखकर उपमेय पर उपमान का अभेद (प्रत्यक्ष) आरोप कर दिया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है (तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययोः)। इसमें वाचक शब्दों का प्रयोग नहीं होता।
- उदाहरण: "चरन-कमल बन्दौ हरिराई।" (चरणों को ही कमल मान लिया गया है)।
हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
रूपक अलंकार की विशेषता बताइए।
रूपक अलंकार की विशेषता:
- विशेषता: जहाँ अत्यधिक सादृश्यता (समानता) के कारण उपमेय और उपमान में कोई भेद न रखकर उपमेय पर उपमान का अभेद (प्रत्यक्ष) आरोप कर दिया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है (तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययोः)। इसमें वाचक शब्दों का प्रयोग नहीं होता।
- उदाहरण: "चरन-कमल बन्दौ हरिराई।" (चरणों को ही कमल मान लिया गया है)।