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निम्नलिखित विषय पर लगभग 500 शब्दों में निबंध लिखिए : "बेरोजगारी : कारण और निवारण"

202325M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 6 (Hindi Essay and Administrative Drafting / हिन्दी निबंध एवं प्रारूप लेखन) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script) by all candidates regardless of their opted medium for GS1–GS4. Answers written in English are not evaluated in the actual examination. The authentic Hindi model answer is provided below for your preparation.

बेरोजगारी : कारण, सामाजिक-आर्थिक दुष्परिणाम एवं समग्र निवारण रणनीति

"बेरोजगारी केवल श्रम की बर्बादी नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय त्रासदी है जो युवाओं से उनका आत्मसम्मान, दिशा और भविष्य छीन लेती है।"

1. प्रस्तावना एवं संकल्पनात्मक स्वरूप:
बेरोजगारी उस आर्थिक अवस्था को कहते हैं जिसमें कार्य करने के इच्छुक, शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम व्यक्ति को प्रचलित मजदूरी दर पर सार्थक रोजगार प्राप्त नहीं हो पाता। भारत में बेरोजगारी का स्वरूप बहुआयामी है—कृषि में प्रच्छन्न/अदृश्य बेरोजगारी (जहाँ आवश्यकता से अधिक लोग लगे हैं), डिग्रीधारियों में शिक्षित बेरोजगारी, तथा तकनीकी बदलावों के कारण संरचनात्मक बेरोजगारी (कौशल और उद्योग की मांग में अंतर)। देश के 65% युवा कार्यबल के जनसांख्यिकीय लाभांश को राष्ट्रीय समृद्धि में बदलने हेतु बेरोजगारी का समाधान अनिवार्य है।

2. बेरोजगारी के प्रमुख कारण:

  • कौशल अंतराल (Skill Gap) एवं अनुपयुक्त शिक्षा: सैद्धांतिक डिग्री शिक्षा की बहुलता, जहाँ व्यावहारिक व तकनीकी कौशल का अभाव है। देश के मात्र 5% कार्यबल के पास ही औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण है।
  • कृषि पर अत्यधिक निर्भरता: ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि रोजगारों की कमी के कारण 45% आबादी कम उत्पादकता वाली कृषि में बंधी है।
  • श्रम-गहन विनिर्माण का धीमा विकास: कपड़ा, चमड़ा, खिलौना, खाद्य प्रसंस्करण जैसे व्यापक रोजगार देने वाले उद्योगों का अपेक्षित गति से न बढ़ पाना।
  • स्वचालन एवं AI का प्रभाव: उद्योगों और सेवा क्षेत्र में मशीनीकरण, रोबोटिक्स और AI द्वारा पारंपरिक नौकरियों का विस्थापन।
  • पूंजी व संस्थागत ऋण की कमी: युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने हेतु बैंकों से बिना गारंटी सुलभ ऋण मिलने में कठिनाइयां।

3. सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव:

  • मानव संसाधन की बर्बादी: कार्यशील युवाओं की ऊर्जा का राष्ट्र निर्माण में उपयोग न हो पाना तथा प्रति व्यक्ति आय में कमी।
  • मानसिक तनाव व अपराध: बेरोजगार युवाओं में कुंठा, अवसाद, नशे की लत तथा भटकाव की प्रवृत्ति में वृद्धि।
  • आर्थिक असमानता: अमीर और गरीब के बीच की खाई का निरंतर चौड़ा होना।

4. शासकीय पहलें एवं मध्य प्रदेश शासन के प्रयास:

  • केंद्र सरकार की योजनाएं: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY 4.0), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), मुद्रा योजना (बिना गारंटी स्वरोजगार ऋण), तथा रेहड़ी-पटरी वालों हेतु 'पीएम स्वनिधि'।
  • मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना (MMSKY): मध्य प्रदेश सरकार की अभिनव पहल, जिसके तहत युवाओं को उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ ₹8,000 से ₹10,000 तक मासिक मानदेय दिया जाता है।
  • मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना: युवाओं को विनिर्माण व सेवा इकाइयों हेतु 3% ब्याज अनुदान पर ₹1 लाख से ₹50 लाख तक का राज्य गारंटीकृत बैंक ऋण।
  • मासिक 'रोजगार दिवस': प्रत्येक जिले में नियमित रोजगार मेलों का आयोजन कर निजी कंपनियों में युवाओं की सीधी भर्ती।

5. बेरोजगारी निवारण हेतु रणनीतिक समाधान (आगे की राह):

  • व्यावसायिक शिक्षा का अनिवार्य समावेश: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत स्कूल स्तर से ही कोडिंग, डेटा, ऑटोमेशन और पारंपरिक शिल्पों का व्यावहारिक प्रशिक्षण।
  • कृषि-प्रसंस्करण एवं ग्रामीण उद्योग: 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) और FPOs के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग व वेयरहाउसिंग क्लस्टर का विकास।
  • स्टार्टअप एवं MSME संवर्धन: नवउद्यमियों हेतु आसान लाइसेंसिंग (सिंगल विंडो), कर छूट तथा सस्ते इनक्यूबेशन सेंटर्स की स्थापना।
  • गिग श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा: प्लेटफॉर्म व डिलीवरी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और स्वास्थ्य बीमा का वैधानिक अधिकार।

6. निष्कर्ष:
बेरोजगारी की समस्या का स्थायी समाधान केवल 'नौकरी मांगने वाले' (Job Seeker) तैयार करने से नहीं, बल्कि युवाओं को 'नौकरी देने वाले' (Job Creator) उद्यमी बनाने में निहित है। व्यावहारिक कौशल, सस्ती पूंजी और आधुनिक तकनीक के समन्वय से हम अपनी विशाल युवा शक्ति को 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत @2047' के निर्माण का प्रमुख इंजन बना सकते हैं।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

निम्नलिखित विषय पर लगभग 500 शब्दों में निबंध लिखिए : "बेरोजगारी : कारण और निवारण"

बेरोजगारी : कारण, सामाजिक-आर्थिक दुष्परिणाम एवं समग्र निवारण रणनीति

"बेरोजगारी केवल श्रम की बर्बादी नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय त्रासदी है जो युवाओं से उनका आत्मसम्मान, दिशा और भविष्य छीन लेती है।"

1. प्रस्तावना एवं संकल्पनात्मक स्वरूप:
बेरोजगारी उस आर्थिक अवस्था को कहते हैं जिसमें कार्य करने के इच्छुक, शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम व्यक्ति को प्रचलित मजदूरी दर पर सार्थक रोजगार प्राप्त नहीं हो पाता। भारत में बेरोजगारी का स्वरूप बहुआयामी है—कृषि में प्रच्छन्न/अदृश्य बेरोजगारी (जहाँ आवश्यकता से अधिक लोग लगे हैं), डिग्रीधारियों में शिक्षित बेरोजगारी, तथा तकनीकी बदलावों के कारण संरचनात्मक बेरोजगारी (कौशल और उद्योग की मांग में अंतर)। देश के 65% युवा कार्यबल के जनसांख्यिकीय लाभांश को राष्ट्रीय समृद्धि में बदलने हेतु बेरोजगारी का समाधान अनिवार्य है।

2. बेरोजगारी के प्रमुख कारण:

  • कौशल अंतराल (Skill Gap) एवं अनुपयुक्त शिक्षा: सैद्धांतिक डिग्री शिक्षा की बहुलता, जहाँ व्यावहारिक व तकनीकी कौशल का अभाव है। देश के मात्र 5% कार्यबल के पास ही औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण है।
  • कृषि पर अत्यधिक निर्भरता: ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि रोजगारों की कमी के कारण 45% आबादी कम उत्पादकता वाली कृषि में बंधी है।
  • श्रम-गहन विनिर्माण का धीमा विकास: कपड़ा, चमड़ा, खिलौना, खाद्य प्रसंस्करण जैसे व्यापक रोजगार देने वाले उद्योगों का अपेक्षित गति से न बढ़ पाना।
  • स्वचालन एवं AI का प्रभाव: उद्योगों और सेवा क्षेत्र में मशीनीकरण, रोबोटिक्स और AI द्वारा पारंपरिक नौकरियों का विस्थापन।
  • पूंजी व संस्थागत ऋण की कमी: युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने हेतु बैंकों से बिना गारंटी सुलभ ऋण मिलने में कठिनाइयां।

3. सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव:

  • मानव संसाधन की बर्बादी: कार्यशील युवाओं की ऊर्जा का राष्ट्र निर्माण में उपयोग न हो पाना तथा प्रति व्यक्ति आय में कमी।
  • मानसिक तनाव व अपराध: बेरोजगार युवाओं में कुंठा, अवसाद, नशे की लत तथा भटकाव की प्रवृत्ति में वृद्धि।
  • आर्थिक असमानता: अमीर और गरीब के बीच की खाई का निरंतर चौड़ा होना।

4. शासकीय पहलें एवं मध्य प्रदेश शासन के प्रयास:

  • केंद्र सरकार की योजनाएं: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY 4.0), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), मुद्रा योजना (बिना गारंटी स्वरोजगार ऋण), तथा रेहड़ी-पटरी वालों हेतु 'पीएम स्वनिधि'।
  • मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना (MMSKY): मध्य प्रदेश सरकार की अभिनव पहल, जिसके तहत युवाओं को उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ ₹8,000 से ₹10,000 तक मासिक मानदेय दिया जाता है।
  • मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना: युवाओं को विनिर्माण व सेवा इकाइयों हेतु 3% ब्याज अनुदान पर ₹1 लाख से ₹50 लाख तक का राज्य गारंटीकृत बैंक ऋण।
  • मासिक 'रोजगार दिवस': प्रत्येक जिले में नियमित रोजगार मेलों का आयोजन कर निजी कंपनियों में युवाओं की सीधी भर्ती।

5. बेरोजगारी निवारण हेतु रणनीतिक समाधान (आगे की राह):

  • व्यावसायिक शिक्षा का अनिवार्य समावेश: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत स्कूल स्तर से ही कोडिंग, डेटा, ऑटोमेशन और पारंपरिक शिल्पों का व्यावहारिक प्रशिक्षण।
  • कृषि-प्रसंस्करण एवं ग्रामीण उद्योग: 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) और FPOs के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग व वेयरहाउसिंग क्लस्टर का विकास।
  • स्टार्टअप एवं MSME संवर्धन: नवउद्यमियों हेतु आसान लाइसेंसिंग (सिंगल विंडो), कर छूट तथा सस्ते इनक्यूबेशन सेंटर्स की स्थापना।
  • गिग श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा: प्लेटफॉर्म व डिलीवरी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और स्वास्थ्य बीमा का वैधानिक अधिकार।

6. निष्कर्ष:
बेरोजगारी की समस्या का स्थायी समाधान केवल 'नौकरी मांगने वाले' (Job Seeker) तैयार करने से नहीं, बल्कि युवाओं को 'नौकरी देने वाले' (Job Creator) उद्यमी बनाने में निहित है। व्यावहारिक कौशल, सस्ती पूंजी और आधुनिक तकनीक के समन्वय से हम अपनी विशाल युवा शक्ति को 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत @2047' के निर्माण का प्रमुख इंजन बना सकते हैं।

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