Home›MPPSC Mains (Eng)›General Hindi & Grammar›General Hindi & Grammar›Rasa & Chhanda (10 marks)›अखिल भुवन चर-अचर जग हरिमुख में लखि मातु। चकित भयो, गद्गद् वचन, विकसित

अखिल भुवन चर-अचर जग हरिमुख में लखि मातु। चकित भयो, गद्गद् वचन, विकसित दृग, पुलकातु॥ इन पंक्तियों में कौन-सा रस है और उसका स्थायी भाव क्या है?

20243M
Model Answer

[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.

पद्य पंक्तियों में रस एवं स्थायी भाव:

"अखिल भुवन चर-अचर जग हरिमुख में लखि मातु।
चकित भयो, गद्गद् वचन, विकसित दृग, पुलकातु॥"

  • रस: अद्भुत रस (माता यशोदा द्वारा श्रीकृष्ण के मुख में संपूर्ण ब्रह्मांड को देखकर चकित होने का वर्णन)।
  • स्थायी भाव: विस्मय (आश्चर्य)।
  • आलंबन: श्रीकृष्ण का मुख; उद्दीपन: मुख में समस्त ब्रह्मांड का दृश्य।

हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

अखिल भुवन चर-अचर जग हरिमुख में लखि मातु। चकित भयो, गद्गद् वचन, विकसित दृग, पुलकातु॥ इन पंक्तियों में कौन-सा रस है और उसका स्थायी भाव क्या है?

पद्य पंक्तियों में रस एवं स्थायी भाव:

"अखिल भुवन चर-अचर जग हरिमुख में लखि मातु।
चकित भयो, गद्गद् वचन, विकसित दृग, पुलकातु॥"

  • रस: अद्भुत रस (माता यशोदा द्वारा श्रीकृष्ण के मुख में संपूर्ण ब्रह्मांड को देखकर चकित होने का वर्णन)।
  • स्थायी भाव: विस्मय (आश्चर्य)।
  • आलंबन: श्रीकृष्ण का मुख; उद्दीपन: मुख में समस्त ब्रह्मांड का दृश्य।
See this question in context →
Free Android App

Practice Better on the StatePYQ Mobile App

⚡ Error Diary · ⏱ Timed Mains Answer Pacer · 📴 Offline Revision Vault

Get it onGoogle Play