अखिल भुवन चर-अचर जग हरिमुख में लखि मातु। चकित भयो, गद्गद् वचन, विकसित दृग, पुलकातु॥ इन पंक्तियों में कौन-सा रस है और उसका स्थायी भाव क्या है?
Model Answer
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
पद्य पंक्तियों में रस एवं स्थायी भाव:
"अखिल भुवन चर-अचर जग हरिमुख में लखि मातु।
चकित भयो, गद्गद् वचन, विकसित दृग, पुलकातु॥"
- रस: अद्भुत रस (माता यशोदा द्वारा श्रीकृष्ण के मुख में संपूर्ण ब्रह्मांड को देखकर चकित होने का वर्णन)।
- स्थायी भाव: विस्मय (आश्चर्य)।
- आलंबन: श्रीकृष्ण का मुख; उद्दीपन: मुख में समस्त ब्रह्मांड का दृश्य।
हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
अखिल भुवन चर-अचर जग हरिमुख में लखि मातु। चकित भयो, गद्गद् वचन, विकसित दृग, पुलकातु॥ इन पंक्तियों में कौन-सा रस है और उसका स्थायी भाव क्या है?
पद्य पंक्तियों में रस एवं स्थायी भाव:
"अखिल भुवन चर-अचर जग हरिमुख में लखि मातु।
चकित भयो, गद्गद् वचन, विकसित दृग, पुलकातु॥"
- रस: अद्भुत रस (माता यशोदा द्वारा श्रीकृष्ण के मुख में संपूर्ण ब्रह्मांड को देखकर चकित होने का वर्णन)।
- स्थायी भाव: विस्मय (आश्चर्य)।
- आलंबन: श्रीकृष्ण का मुख; उद्दीपन: मुख में समस्त ब्रह्मांड का दृश्य।