सोरठा छंद को परिभाषित कीजिए। पर 25 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
सोरठा छंद की परिभाषा एवं लक्षण:
1. परिभाषा: सोरठा अर्द्धसम मात्रिक छंद है। यह दोहा छंद का ठीक उलटा (विपरीत) होता है। इसमें चार चरण होते हैं।
2. लक्षण:
- इसके प्रथम एवं तृतीय (विषम) चरणों में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
- इसके द्वितीय एवं चतुर्थ (सम) चरणों में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विषम चरणों के अंत में तुक मिलती है।
3. उदाहरण:
"मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिबर गहन।
जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"
हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
सोरठा छंद को परिभाषित कीजिए। पर 25 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
सोरठा छंद की परिभाषा एवं लक्षण:
1. परिभाषा: सोरठा अर्द्धसम मात्रिक छंद है। यह दोहा छंद का ठीक उलटा (विपरीत) होता है। इसमें चार चरण होते हैं।
2. लक्षण:
- इसके प्रथम एवं तृतीय (विषम) चरणों में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
- इसके द्वितीय एवं चतुर्थ (सम) चरणों में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विषम चरणों के अंत में तुक मिलती है।
3. उदाहरण:
"मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिबर गहन।
जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"