(अथवा)
कर्म प्रधान विश्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फल चाखा॥
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
भाव पल्लवन (Expansion of Idea):
सूक्ति: "कर्म प्रधान विश्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फल चाखा॥"
पल्लवन:
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस की यह चौपाई सृष्टि के शाश्वत 'कर्म सिद्धांत' (Law of Karma) को प्रतिपादित करती है। विधाता ने इस संपूर्ण संसार को कर्म-आधारित बनाया है। यहाँ प्रत्येक मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है।
संसार एक खेत के समान है, जहाँ मनुष्य जैसा कर्म रूपी बीज बोता है, उसे भविष्य में वैसा ही फल प्राप्त होता है। सत्कर्म, पुरुषार्थ, निष्ठा और परोपकार करने वाले को सुख, यश और आत्मिक शांति मिलती है; जबकि दुष्कर्म और आलस्य में लिप्त व्यक्ति को दुःख, अपयश और पतन भोगना पड़ता है। अतः मनुष्य को भाग्यवादी बनकर निष्क्रिय बैठने के स्थान पर कर्मयोगी बनकर सदैव श्रेष्ठ और लोकमंगलकारी कर्मों में प्रवृत्त रहना चाहिए।
हिंदी में प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
(अथवा)
कर्म प्रधान विश्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फल चाखा॥
भाव पल्लवन (Expansion of Idea):
सूक्ति: "कर्म प्रधान विश्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फल चाखा॥"
पल्लवन:
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस की यह चौपाई सृष्टि के शाश्वत 'कर्म सिद्धांत' (Law of Karma) को प्रतिपादित करती है। विधाता ने इस संपूर्ण संसार को कर्म-आधारित बनाया है। यहाँ प्रत्येक मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है।
संसार एक खेत के समान है, जहाँ मनुष्य जैसा कर्म रूपी बीज बोता है, उसे भविष्य में वैसा ही फल प्राप्त होता है। सत्कर्म, पुरुषार्थ, निष्ठा और परोपकार करने वाले को सुख, यश और आत्मिक शांति मिलती है; जबकि दुष्कर्म और आलस्य में लिप्त व्यक्ति को दुःख, अपयश और पतन भोगना पड़ता है। अतः मनुष्य को भाग्यवादी बनकर निष्क्रिय बैठने के स्थान पर कर्मयोगी बनकर सदैव श्रेष्ठ और लोकमंगलकारी कर्मों में प्रवृत्त रहना चाहिए।