रेखांकित अथवा दी गई पंक्तियों का पल्लवन अथवा भाव पल्लवित कीजिए: "मुर्दा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।"
भाव पल्लवन (Expansion of Idea):
सूक्ति: "मुर्दा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।"
पल्लवन:
साहित्य किसी भी समाज और राष्ट्र की जीवंत चेतना, आत्मा और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रत्यक्ष दर्पण होता है। जिस प्रकार प्राण-वायु के बिना शरीर निष्प्राण एवं जड़ (मुर्दा) हो जाता है, ठीक उसी प्रकार साहित्य के अभाव में कोई भी देश वैचारिक, नैतिक और संवेदनात्मक दृष्टि से मृतप्राय हो जाता है।
साहित्य ही जनता के भीतर राष्ट्रीय स्वाभिमान, देश-प्रेम, क्रांति और मानवीय संवेदनाओं का संचार करता है। स्वतंत्रता संग्राम में मैथिलीशरण गुप्त, दिनकर, माखनलाल चतुर्वेदी और निराला की कविताओं ने सोए हुए राष्ट्र में नव-प्राण फूँक दिए थे। साहित्य समाज को मार्गदर्शन देता है, अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाता है और भावी पीढ़ियों के लिए उदात्त जीवन-मूल्यों को सुरक्षित रखता है।
जिस देश के पास अपना उच्च कोटि का साहित्य नहीं होता, उसकी जनता दिशाहीन हो जाती है, उसकी संस्कृति नष्ट हो जाती है और वह भौतिक रूप से कितना भी समृद्ध क्यों न हो, वैश्विक पटल पर उसका अस्तित्व निष्प्राण माना जाता है। अतः साहित्य किसी राष्ट्र का वह अविनाशी प्राण-तत्व है जो उसे अमर बनाए रखता है।
In English (Question & Model Answer)
रेखांकित अथवा दी गई पंक्तियों का पल्लवन अथवा भाव पल्लवित कीजिए: "मुर्दा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।"
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
भाव पल्लवन (Expansion of Idea):
सूक्ति: "मुर्दा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।"
पल्लवन:
साहित्य किसी भी समाज और राष्ट्र की जीवंत चेतना, आत्मा और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रत्यक्ष दर्पण होता है। जिस प्रकार प्राण-वायु के बिना शरीर निष्प्राण एवं जड़ (मुर्दा) हो जाता है, ठीक उसी प्रकार साहित्य के अभाव में कोई भी देश वैचारिक, नैतिक और संवेदनात्मक दृष्टि से मृतप्राय हो जाता है।
साहित्य ही जनता के भीतर राष्ट्रीय स्वाभिमान, देश-प्रेम, क्रांति और मानवीय संवेदनाओं का संचार करता है। स्वतंत्रता संग्राम में मैथिलीशरण गुप्त, दिनकर, माखनलाल चतुर्वेदी और निराला की कविताओं ने सोए हुए राष्ट्र में नव-प्राण फूँक दिए थे। साहित्य समाज को मार्गदर्शन देता है, अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाता है और भावी पीढ़ियों के लिए उदात्त जीवन-मूल्यों को सुरक्षित रखता है।
जिस देश के पास अपना उच्च कोटि का साहित्य नहीं होता, उसकी जनता दिशाहीन हो जाती है, उसकी संस्कृति नष्ट हो जाती है और वह भौतिक रूप से कितना भी समृद्ध क्यों न हो, वैश्विक पटल पर उसका अस्तित्व निष्प्राण माना जाता है। अतः साहित्य किसी राष्ट्र का वह अविनाशी प्राण-तत्व है जो उसे अमर बनाए रखता है।