रेखांकित अथवा दी गई पंक्तियों का पल्लवन अथवा भाव पल्लवन कीजिए :
'नर और नारी जन्मते और मरते हैं, परन्तु राष्ट्र सदा अमर रहता है।'
भाव पल्लवन (Expansion of Idea):
सूक्ति: "नर और नारी जन्मते और मरते हैं, परन्तु राष्ट्र सदा अमर रहता है।"
पल्लवन:
व्यक्ति का जीवन नश्वर और क्षणभंगुर है। सृष्टि के शाश्वत नियमानुसार प्रत्येक नर और नारी का जन्म होता है, वे अपनी जीवन-यात्रा पूरी करते हैं और काल के गाल में समा जाते हैं। पीढ़ियाँ आती हैं और चली जाती हैं, किन्तु राष्ट्र एक अविनाशी, जीवंत एवं सांस्कृतिक इकाई है जो युगों-युगों तक अक्षुण्ण रहता है।
राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, अपितु वहाँ की संस्कृति, इतिहास, मूल्यों और जन-चेतना का चिरंतन प्रवाह है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके नागरिकों के त्याग, बलिदान और राष्ट्र-समर्पण पर टिकी होती है। व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने संकीर्ण स्वार्थों से ऊपर उठकर उस अमर राष्ट्र की संप्रभुता, अखंडता एवं विकास के लिए स्वयं को समर्पित करे, क्योंकि व्यक्ति का अस्तित्व तभी तक सार्थक है जब तक उसका राष्ट्र जीवित और गौरवशाली है।
In English (Question & Model Answer)
रेखांकित अथवा दी गई पंक्तियों का पल्लवन अथवा भाव पल्लवन कीजिए :
'नर और नारी जन्मते और मरते हैं, परन्तु राष्ट्र सदा अमर रहता है।'
[Note for English Medium Aspirants]: As per official MPPSC Examination Rules, Paper 5 (General Hindi & Grammar / सामान्य हिन्दी एवं व्याकरण) must be attempted exclusively in Hindi (Devanagari script). The authentic Hindi model answer is provided below.
भाव पल्लवन (Expansion of Idea):
सूक्ति: "नर और नारी जन्मते और मरते हैं, परन्तु राष्ट्र सदा अमर रहता है।"
पल्लवन:
व्यक्ति का जीवन नश्वर और क्षणभंगुर है। सृष्टि के शाश्वत नियमानुसार प्रत्येक नर और नारी का जन्म होता है, वे अपनी जीवन-यात्रा पूरी करते हैं और काल के गाल में समा जाते हैं। पीढ़ियाँ आती हैं और चली जाती हैं, किन्तु राष्ट्र एक अविनाशी, जीवंत एवं सांस्कृतिक इकाई है जो युगों-युगों तक अक्षुण्ण रहता है।
राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, अपितु वहाँ की संस्कृति, इतिहास, मूल्यों और जन-चेतना का चिरंतन प्रवाह है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके नागरिकों के त्याग, बलिदान और राष्ट्र-समर्पण पर टिकी होती है। व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने संकीर्ण स्वार्थों से ऊपर उठकर उस अमर राष्ट्र की संप्रभुता, अखंडता एवं विकास के लिए स्वयं को समर्पित करे, क्योंकि व्यक्ति का अस्तित्व तभी तक सार्थक है जब तक उसका राष्ट्र जीवित और गौरवशाली है।