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भारत में 'मतदान का अधिकार' है एक -

20182Mprelimsyear-2018p2
A.(A) मौलिक अधिकार
B.(B) प्राकृतिक अधिकार
C.(C) संवैधानिक अधिकार
D.(D) कानूनी अधिकारसही
व्याख्या एवं हल

सही उत्तर: (D) विधिक अधिकार

भारत में 'मताधिकार' मुख्य रूप से एक विधिक अधिकार (तथा सांविधिक अधिकार) है, न कि मौलिक अधिकार। मुख्य तथ्य निम्नलिखित हैं:

  • यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 द्वारा प्रदत्त है।
  • यद्यपि इसे संवैधानिक संप्रबलता प्राप्त है, तथापि उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे, पी.यू.सी.एल. बनाम भारत संघ) में इसे मौलिक अधिकार के स्थान पर एक सांविधिक/विधिक अधिकार के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • यह न तो मौलिक अधिकार (भाग III) है और न ही नैसर्गिक अधिकार, जिससे विकल्प (D) मप्र लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा स्वीकृत सबसे सटीक विधिक वर्गीकरण बन जाता है।

In English (Question & Model Answer)

'Right to Vote' in India is a

A.(A) Fundamental Right
B.(B) Natural Right
C.(C) Constitutional Right
D.(D) Legal RightCorrect

Correct Answer: (D) Legal Right

The 'Right to Vote' in India is primarily a Legal Right (and a statutory right), not a Fundamental Right. Key facts include:

  • It is conferred by Article 326 of the Constitution of India and the Representation of the People Act, 1951.
  • While it has constitutional backing, landmark Supreme Court rulings (e.g., PUCL v. Union of India) classify it as a statutory/legal right rather than a fundamental one.
  • It is not a Fundamental Right (Part III) or a Natural Right, making option (D) the most precise legal classification accepted by the MPPSC.
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